Bihar Fake IPS Officer:फर्जी आईपीएस साहब का रोब-दाब देख चकरा गई असली पुलिस, खाकी की अक्ल पर ऐसे लगा दिया था ताला और....
Bihar Fake IPS Officer: एक नटवरलाल ने जब खुद को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताया, तो असली खाकीधारियों का ईमान और दिमाग दोनों घुटनों पर आ गए।
Bihar Fake IPS Officer: औरंगाबाद की आलीशान पुलिसिंग का नया कारनामा सामने आया है। एक नटवरलाल ने जब खुद को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी बताया, तो असली खाकीधारियों का ईमान और दिमाग दोनों घुटनों पर आ गए। जनाब ने सिर्फ एक कॉल घुमाया, और नगर थाने की गश्ती टीम हाथ बांधकर, सिर झुकाकर हुजूर की तामील में लग गई। पूरे दिन शहर में मुस्तैद पुलिस अपनी ही नाकामी का इश्तहार बांटती रही और यह फर्जी कप्तान औरंगाबाद पुलिस को उसकी असली औकात दिखाकर शाम को मजे से रफूचक्कर हो गया।
इशारे पर खाकी नची, वसूली का मुकम्मल इंतज़ाम
फर्जी 'साहब' का रौब ऐसा था कि एनएच-139 पर जसोइया मोड़ से सीमेंट फैक्ट्री तक असली पुलिस वाले बस पीछे-पीछे जी-हुज़ूरी करते रहे। रास्ते में सब्जी बेचने वाले से लेकर टेंपो यात्रियों तक की तलाशी ली गई, सवाल-जवाब हुए और डराया-धमकाया गया। हद तो तब हो गई जब फर्जी आईपीएस ने थाने के असली दारोगा जी को भी फोन पर बात करने से रोक दिया और दारोगा जी चुपचाप ज़िल्लत का घूंट पीकर सहते रहे। कानून के इन रखवालों ने वर्दी की साख को एक ठग के कदमों में गिर्वी रख दिया।
दारोगा की एक कॉल और टूट गया नाटक
इस पूरे नाटक का पर्दाफाश पुलिस की किसी शातिर तफ्तीश से नहीं, बल्कि एक पीड़ित युवक के रिश्तेदार की सूझबूझ से हुआ। जब पकड़ा गया युवक झारखंड पुलिस के अपने दारोगा रिश्तेदार से बात करने लगा, तो नकली आईपीएस साहब के हाथ-पांव फूल गए। सिद्धि और चालाकी का सारा नकाब उतरते ही आरोपी दोनों युवकों को सड़क किनारे फेंककर फरार हो गया।
मुजरिम गायब, मालिक और ड्राइवर से छुपा रहे नाकामी
अब जब फजीहत पूरे सूबे में फैल चुकी है, तो औरंगाबाद पुलिस अपनी बदनामी छुपाने के लिए लीपापोती में जुट गई है। एरका चेकपोस्ट पर लावारिस मिली स्कॉर्पियो, उसके ड्राइवर पिंटू और कुंदन को गिरफ्तार कर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है। मास्टरमाइंड तो अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है और खाकी बस छापेमारी का ढोंग रच रही है।
इस घटना ने साफ कर दिया है कि जब दहशत फैलाने और रौब जमाने की बात हो, तो औरंगाबाद पुलिस किसी आम ठग के आगे भी घुटने टेकने में देर नहीं लगाती। सवाल यह है कि जो पुलिस एक फर्जी फोन कॉल की सच्चाई नहीं जांच सकती, वह जनता की सुरक्षा का क्या रखवाला बनेगी?
रिपोर्ट- दीनानाथ मौआर