BPSC एग्जाम में मास्टर माइंड का खेल! ब्लूटूथ, व्हाट्सएप गैंग और सेटिंग का सिंडिकेट बेनकाब,AEDO परीक्षा रद्द, 32 कैंडिडेट्स ब्लैकलिस्ट
BPSC exam cancelled: जिस इम्तिहान को लाखों उम्मीदवारों ने अपने सपनों का दरवाज़ा समझा था, वहीं अब जुर्म, जालसाजी और जुगाड़ का अड्डा बन गया।...
BPSC exam cancelled:बिहार में सरकारी नौकरी की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक मानी जा रही सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा अब एक संगीन एग्जाम स्कैम में तब्दील हो चुकी है। जिस इम्तिहान को लाखों उम्मीदवारों ने अपने सपनों का दरवाज़ा समझा था, वहीं अब जुर्म, जालसाजी और जुगाड़ का अड्डा बन गया। BPSC ने इस पूरे मामले पर बड़ा एक्शन लेते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया है और 32 अभ्यर्थियों को सीधे तौर पर ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया गया है।
दरअसल, यह पूरा मामला एक संगठित नकल माफिया के नेटवर्क की तरफ इशारा करता है, जहां टेक्नोलॉजी और अंदरूनी सेटिंग के जरिए सिस्टम को ही हैक करने की कोशिश की गई। 6 जिलों में दर्ज 8 FIR इस बात की गवाही दे रही हैं कि खेल सिर्फ छोटे स्तर का नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक पूरा गैंग काम कर रहा था। अब तक 36 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें सबसे ज्यादा 22 आरोपी मुंगेर से दबोचे गए हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का मास्टर माइंड अभी भी फरार है, जिसे कोड नेम मास्टर दिया गया है। यही शख्स व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल कर रहा था। एम मुंगेर और मुंगेर सॉल्यूशन नाम के दो ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें पहले से चुने गए कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड शेयर किए जाते थे। प्लान यह था कि परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर की आड़ में बैठे लोग क्वेश्चन पेपर की तस्वीर खींचकर ‘मास्टर’ तक पहुंचाएंगे, और फिर वहां से तैयार जवाब वापस कैंडिडेट्स तक भेजे जाएंगे।
मुंगेर से पकड़े गए 20 वर्षीय सुजल कुमार ने पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उसके पास से लैपटॉप, आईपैड, एडमिट कार्ड्स और सीरियल नंबर वाले पर्चे बरामद हुए, जिन पर जवाब लिखे जाने थे। यह पूरा सेटअप किसी फिल्मी ‘क्राइम सिंडिकेट’ से कम नहीं था। सुजल खुद एक बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम कर रहा था, जिसे जयपुर की साईं एडूकेयर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने नियुक्त किया था।
यहीं से कहानी और भी पेचीदा हो जाती है। जिस कंपनी को बायोमेट्रिक अटेंडेंस का ठेका दिया गया, उसी के कर्मचारियों की भूमिका अब संदेह के घेरे में है। सूत्रों के मुताबिक, इस कंपनी को पहले भी गड़बड़ी के आरोप में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा डिबार किया जा चुका था। इसके बावजूद BPSC द्वारा इसे जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े करता है।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस मास्टर का कनेक्शन एक स्थानीय कोचिंग सेंटर राठौड़ क्लासेज से भी हो सकता है। कोचिंग का मालिक भी इस खेल में शामिल बताया जा रहा है और फिलहाल फरार है। इस पूरे नेटवर्क में बायोमेट्रिक ऑपरेटर, सुपरवाइजर, कैंडिडेट्स और बाहरी मददगार सबकी मिलीभगत की आशंका है।
नालंदा और सासाराम जैसे जिलों से भी चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। एक महिला अभ्यर्थी के पास से परीक्षा के दौरान आंसर-की बरामद हुई, जिसने पूछताछ में बताया कि उसे बायोमेट्रिक कर्मियों ने ही जवाब उपलब्ध कराए थे। वहीं, ‘मास्टर’ की अपनी बहन के लिए भी पूरा सेटअप तैयार किया गया था, जिससे साफ है कि यह रैकेट कितनी गहराई तक फैला हुआ था।आर्थिक अपराध इकाई अब इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी है। डिजिटल एविडेंस, मोबाइल डेटा, ब्लूटूथ डिवाइस और व्हाट्सएप चैट्स की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। सुजल कुमार समेत कई आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी है, ताकि ‘मास्टर माइंड’ तक पहुंचा जा सके।
हालांकि, आयोग ने यह साफ किया है कि पेपर लीक का कोई ठोस सबूत अभी तक नहीं मिला है, लेकिन सिस्टम में सेंध और नकल के प्रयास इतने बड़े पैमाने पर हुए कि परीक्षा की साख ही सवालों के घेरे में आ गई। यही वजह है कि 14 से 21 अप्रैल तक हुई सभी 9 पालियों की परीक्षा और 23 अप्रैल की एक अन्य परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया। करीब 11 लाख उम्मीदवारों के सपनों पर फिलहाल ‘ब्रेक’ लग गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां इस ‘एग्जाम माफिया’ का पूरा चक्रव्यूह कब तोड़ पाएंगी और असली गुनहगार कब सलाखों के पीछे होंगे। यह मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख और पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है।