Bihar School Crime:जातियों की बंदिशों से परे दरिंदगी से इंसानियत शर्मसार, जातिवादी सोच वाले बिहार के लोगों को स्कूल में गंदा काम ने हिला दिया
Bihar School Crime:बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव स्थित नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय में घटित जघन्य कांड ने गुरु-शिष्य परंपरा और इंसानियत दोनों को पूरी तरह तार-तार कर दिया है।...
Bihar School Crime:बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव स्थित नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय में घटित जघन्य कांड ने गुरु-शिष्य परंपरा और इंसानियत दोनों को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। विद्या के मंदिर में मासूम नाबालिग बच्चियों के साथ हुए इस गंभीर अपराध ने हर संवेदनशील नागरिक के जमीर को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद और जघन्य घटना पर किसी भी तरह की जातीय या सामाजिक राजनीति करने के बजाय केवल पीड़िता बच्चियों को त्वरित न्याय दिलाने और न्याय व्यवस्था की जवाबदेही तय करने पर ध्यान केंद्रित करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।
बिहार के बक्सर में नथुनी अहीर के डेरा मध्यविधालय में बच्चियों से दुष्कर्म कांड में कोई भी मनुवादी, सामंती नहीं.....।इंसानियत मरी है, इसलिए केवल इसी पक्ष का ध्यान रखें ...पिछले कुछ सालों से कुछ भटके जातिवादी लोगों द्वारा मनुवाद और सामंती ताकतों को गाली दिया जा रहा है, आपको जानकर हैरानी होगी कि नथुनी अहीर के डेरा मध्यविधालय में ना कोई मनुवादी व्यक्ति पर आरोप लगा है और ना ही मनुवादी ताकतें किसी को बचाने का कार्य कर रही हैँ ....।
छोटी- छोटी 12 छात्राओं के साथ दुष्कर्म करने वाले शिक्षकों का परिचय देखे:---
बीपीएससी -2 (2024) शिक्षक अरविंद कुमार पिता प्रेमचंद प्रसाद, ग्राम -- ब्रह्मपुर, जिला -- बक्सर, जाति -- नोनिया.....।
सहायक शिक्षक (2012) फर्जी शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद पिता - रघुनाथ प्रसाद, ग्राम - सोवा (डुमरांव) , जाती -- गड़ेर....।
पीड़ित छात्रा :-- यादव और दलित..।
हेड मास्टर मुहम्मद इमाम पर आरोप है कि वे पूरे मामले क़ो दबा रहे थे और शिक्षकों क़ो भागने में मदद की.
अब तक उक्त केस में मनुवादी व्यक्ति या मनुवादी ताकतों का हाथ रहता तो, कुछ लोग सड़कों पर उतर जाते, आरोपियों के घर में घुस कर सब समान जला देते, परिजनों को चोट पहुंचाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।सोशल मीडिया तो गाली -गलौज से भर गया होता.यह बेहद गंभीर बात है कि कई लोगों क़ो इस बात कि आशंका है कि इस केस क़ो भी पटना के NEET कांड कि तरह मैनेज कर लिया जायेगा.इस बात कि भी पूरी संभावना है कि नाबालिक छात्राओं के दुष्कर्म के आरोपियों का केस वैसे ही मैनेज कर लिया जाएगा,जैसे सहायक शिक्षक बीरेन्द्र 2012 से फर्जी कागजात पर शिक्षक बन नौकरी कर रहा है और कोई कार्रवाई नहीं हुई है...और ना जाने कितनी छात्राओं के साथ इसने दुष्कर्म किया होगा।
क्या यह बात बीईओ (ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर) या डीईओ ( डिस्ट्रीक एजुकेशन ऑफिसर) को पता नहीं होगी.? कि बीरेंद्र फर्जी शिक्षक है, लेकिन बिईओ और डीईओ ने खूब पैसा खाया और बीरेंद्र को बचाते रहे।बिहार सरकार और जिला प्रशासन को बिईओ और डीईओ को तुरंत सस्पेंड करना चाहिए क्योंकि नाबालिक बालिकाओं के दुष्कर्म में इनकी भी मौन सहमति है।
हम बार बार कहते है इंसानों को जातियों में मत बाटो..?
हर जाति में कुछ बेहुदे-घटिया टाइप लोग रहते है और किसी एक की गलती के लिए पूरी जाति समुदाय दोषी नहीं हो जाता है, इसलिए मनुवाद और सामंतवाद को गाली देना बंद कर इंसान बनो। उक्त घटना में दोषी शिक्षकों का केस कोई वकील ना ले.और कोई इन दुष्कर्मी शिक्षकों का बचाव करता है तो उन छोटी छोटी बच्चियों के साथ इन दोनों का दुष्कर्म कर रहे उस वीडियो को दिखा दो, बचाव पक्ष का व्यक्ति भी इनकी इनकाउंटर की बात करेगा.....।जिला प्रशासन से आग्रह है कि दोषी शिक्षकों पर कठोर से कठोर कार्रवाई हो ताकि आनेवाले समय में कोई शिक्षक इस तरह की शर्मनाक घटना किसी छात्रा से ना करें।
मासूम बच्चियों के खिलाफ हुए अपराधों में किसी भी प्रकार का जातिगत, धार्मिक या पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण न्याय की राह में बाधा बनता है। अपराधी की कोई जाति या मजहब नहीं होता; उसका एकमात्र परिचय उसका अपराध है। कानून के समक्ष बिना किसी रियायत या ढिलाई के ऐसी नजीर पेश की जानी चाहिए जिससे कोई भी व्यक्ति ऐसा कृत्य करने की हिम्मत न जुटा सके।
रिपोर्ट- धीरेंद्र कुमार