पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड मामले में CBI की कई राज्यों में छापेमारी, 900 करोड़ की ठगी का आरोप

CBI के अनुसार, इस गिरोह ने पिछले वर्ष ही देशभर के पीड़ितों से लगभग 900 करोड़ रुपये की ठगी की। करीब 15 शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए इन पैसों को ट्रांसफर और लॉन्ड्र किया गया।

part-time job fraud case
part-time job fraud case- फोटो : news4nation

Crime News : Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म Pyypl से जुड़े बड़े ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी मामले में दिल्ली समेत कई राज्यों में छापेमारी की है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि एजेंसी ने इस मामले में 15 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले के कथित मास्टरमाइंड चार्टर्ड अकाउंटेंट Ashok Kumar Sharma की कस्टडी लेने की तैयारी की जा रही है। शर्मा को हाल ही में Enforcement Directorate (ED) ने गिरफ्तार किया था।


यह मामला Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), जो केंद्रीय गृह मंत्रालय की एंटी-साइबर क्राइम इकाई है, द्वारा CBI को सौंपा गया था। इसके बाद एजेंसी ने केस दर्ज कर बुधवार को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में एक साथ तलाशी अभियान चलाया।


जांच एजेंसियों के अनुसार, शर्मा कथित तौर पर दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर बिजवासन स्थित अपने कार्यालय से एक संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क चला रहा था। इस नेटवर्क को “बिजवासन ग्रुप” के नाम से जाना जाता है। इस गिरोह पर फर्जी निवेश योजनाओं, साइबर फ्रॉड, अवैध क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर ठगी करने का आरोप है। 


एजेंसी के अनुसार, इस गिरोह ने पिछले वर्ष ही देशभर के पीड़ितों से लगभग 900 करोड़ रुपये की ठगी की। जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 15 शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए इन पैसों को ट्रांसफर और लॉन्ड्र किया गया। CBI के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह मामला बड़े पैमाने पर संगठित ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड से जुड़ा है, जिसमें ऑफशोर निकासी और विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म, खासकर दुबई आधारित Pyypl, का इस्तेमाल किया गया।


जांच में सामने आया है कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं के जरिए लोगों को अधिक रिटर्न वाले निवेश और पार्ट-टाइम जॉब का लालच देता था। शुरुआत में पीड़ितों से छोटी राशि निवेश करवाई जाती थी और उन्हें नकली मुनाफा दिखाकर भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद उनसे बड़ी रकम निवेश कराने के लिए प्रेरित किया जाता था।


एजेंसी के अनुसार, ठगी से जुटाए गए पैसे को कई म्यूल बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था ताकि उसका पता लगाना मुश्किल हो। बाद में डेबिट कार्ड के जरिए विदेशी एटीएम से नकदी निकाली जाती थी। इसके अलावा वीज़ा और मास्टरकार्ड नेटवर्क के माध्यम से विदेशी फिनटेक वॉलेट, विशेषकर Pyypl, में टॉप-अप कर पैसे को बाहर निकाला जाता था। बैंकिंग सिस्टम में ये लेनदेन पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) ट्रांजैक्शन के रूप में दर्ज होते थे।