Bihar Crime: नाच-गाने की आड़ में गंदा काम करने वाले रैकेट का पर्दाफाश, 44 लड़कियों को पुलिस ने कराया आजाद, लाईं गईं थीं राजस्थान और असम से
Bihar Crime: बिहार की सरजमीं पर वह नज़ारा सामने आया है, जिसे देखकर जुर्म भी शायद अपनी शक्ल छुपा ले।....
Bihar Crime: गोपालगंज की सरज़मीं पर वह नज़ारा सामने आया है, जिसे देखकर जुर्म भी शायद अपनी शक्ल छुपा ले। कुचायकोट थाना इलाके में पुलिस ने आर्केस्ट्रा के नाम पर चल रहे जिस मनोरंजन के कारोबार पर छापा मारा, वहां से 44 से ज्यादा नाबालिग बच्चियों को आज़ाद कराया गया। यह आज़ादी किसी जश्न की नहीं, बल्कि उस अंधेरे की थी जिसमें मासूमियत को नाच-गाने के नाम पर बेचा जा रहा था। कहने को तो यह स्टेज शो था, मगर हकीकत में यह एक ऐसा बाजार निकला जहां बचपन की कीमत तय की जा रही थी। 15 से अधिक आर्केस्ट्रा ग्रुप्स पर एक साथ हुई छापेमारी में 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क ट्रैफिकिंग और शोषण की गहरी जड़ें फैला चुका था।
इस कार्रवाई की कमान अमित जेन और एसपी विनय तिवारी की निगरानी में चली। संयुक्त टीम में पुलिस, सामाजिक संगठन और वालंटरी एजेंसियां शामिल थीं। लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े तमाशे के पीछे यह सिस्टम कब तक आंख मूंदे बैठा रहा? मुक्त कराई गई बच्चियों की उम्र 10 से 17 साल के बीच बताई जा रही है। किसी को फिल्मी दुनिया का सपना दिखाया गया, किसी को रुपयों की बरसात का लालच, तो किसी को कथित प्रेम के जाल में फंसाकर इस दलदल में धकेल दिया गया। काउंसलिंग में कई बच्चियों ने जो दर्द बयान किया, वह सिस्टम के चेहरे पर तमाचा है।
सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह शादी-विवाह के सीजन में सक्रिय होता था। भोजपुरी गानों पर डांस के नाम पर जो मंच सजता था, वहां असल में मासूमियत की सौदेबाज़ी होती थी। कुछ बच्चियों ने तो यहां तक कहा कि उन्हें बेच दिया गया।अब पुलिस ने 21 आरोपियों की लंबी सूची तैयार की है, जिनमें पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार के कई लोग शामिल हैं। यह वही नाम हैं जो इस “नाच-गाने” की चमक के पीछे का काला सच बनकर सामने आए हैं।
एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी है कि बरामद बच्चियों में एक किशोरी राजस्थान की है, जो पिछले पांच साल से लापता थी। यानी यह सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय व्यापार था जहां बचपन को सामान की तरह ढोया जा रहा था। बिहार पुलिस ने इसे बड़ी सफलता बताया है, लेकिन समाज के लिए यह सवाल छोड़ गया है कि आखिर कब तक मनोरंजन के नाम पर इंसानियत की ऐसी नुमाइश चलती रहेगी?
रिपोर्ट- नमोनारायण मिश्रा