Bihar Crime: स्टेशन बना बच्चों की रहस्यमयी मंडी! 21 नाबालिगों का रेस्क्यू, धर्मांतरण नेटवर्क का पर्दाफाश, पुलिस एजेंसियां अलर्ट पर

Bihar Crime:रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 21 मासूम बच्चों को संदिग्ध हालत में रेस्क्यू किया गया। ...

Motihari 21 Minors Rescued from Station Conversion Racket Un
धर्मांतरण नेटवर्क का पर्दाफाश- फोटो : social Media

Bihar Crime:पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित बापूधाम रेलवे स्टेशन पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस  की संयुक्त कार्रवाई में 21 मासूम बच्चों को संदिग्ध हालत में रेस्क्यू किया गया। यह कार्रवाई किसी सामान्य गश्ती या चेकिंग का हिस्सा नहीं थी, बल्कि एक ऐसे गहरे और रहस्यमयी नेटवर्क की परतें खोलने वाली साबित हुई जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब स्टेशन परिसर में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। टीम ने तुरंत घेराबंदी की और एक युवक को हिरासत में लिया। शुरुआती पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। पकड़ा गया युवक पहले हिंदू धर्म से जुड़ा था, लेकिन बाद में उसने कथित तौर पर ईसाई धर्म अपना लिया था।

जानकारी के अनुसार, यह युवक पिछले लगभग तीन महीनों से मोतिहारी के चांदमारी मोहल्ले में एक किराए के मकान में रह रहा था। इसी मकान में इन 21 बच्चों को कथित रूप से रखा गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इन बच्चों को अलग-अलग जगहों से लाकर एक स्थान पर इकट्ठा किया गया था, और इनके आने-जाने का पूरा नेटवर्क बेहद गोपनीय तरीके से संचालित हो रहा था।आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि युवक के बयान बार-बार बदल रहे हैं, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि युवक की पत्नी रांची से बच्चों को मोतिहारी भेजने की प्रक्रिया में किसी न किसी रूप में शामिल थी। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के अधीन है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस मकान में बच्चों को रखा गया था वहां सामान्य गतिविधियों के बजाय अत्यधिक निगरानी, सीमित संपर्क और बाहरी दुनिया से दूरी जैसी परिस्थितियां पाई गईं। बच्चों को किन परिस्थितियों में रखा गया था और उनका उद्देश्य क्या था, यह अभी जांच का विषय है।प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि मामला केवल बच्चों के आवास या देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जो कथित तौर पर धर्म परिवर्तन और अन्य गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

आरपीएफ पोस्ट कमांडेंट भरत प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम ने त्वरित कार्रवाई की और बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। सभी बच्चों को तत्काल बाल हेल्पलाइन और महिला हेल्पलाइन के हवाले कर दिया गया है, ताकि उनकी सुरक्षा और काउंसलिंग सुनिश्चित की जा सके।इधर, जीआरपी ने इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर ली है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस गिरोह के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।

सबसे चिंताजनक बात यह भी सामने आई है कि चांदमारी इलाके में अभी भी करीब 20 अन्य बच्चों के मौजूद होने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है और छापेमारी अभियान तेज कर दिया गया है।स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर भय और आश्चर्य दोनों का माहौल है। लोग यह समझ नहीं पा रहे कि उनके आसपास इतनी बड़ी गतिविधि कब और कैसे चल रही थी। वहीं प्रशासन इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है।

फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस इस बात पर है कि इस नेटवर्क का असली सरगना कौन है, बच्चों को वहां क्यों रखा गया था और इस पूरे खेल के पीछे अंतिम मकसद क्या था। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस रहस्यमयी मामले की परतें और भी गहरी होती जा रही हैं। बापूधाम मोतिहारी का यह मामला अब सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि एक बड़े और संगठित साजिश की तरफ इशारा करता प्रतीत हो रहा है, जिसने पूरे पूर्वी चंपारण को झकझोर कर रख दिया है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार