Bihar Police Crime: शराब मिली नहीं, फिर भी दरोगा जी का भौकाल रहा जारी! पिस्टल सटा कर शख्स को उठाया, एसपी ने दरोगा सहित चार पुलिस कर्मी को किया निलंबित

Bihar Police Crime: वर्दी की हनक और कानून की हद के बीच ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।...

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दरोगा जी का भौकाल - फोटो : reporter

Bihar Police Crime: मोतीहारी में वर्दी की हनक और कानून की हद के बीच ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि संग्रामपुर थाना के दरोगा जी सादे लिबास में हाथ में पिस्टल लेकर सिपाहियों के साथ एक घर में छापेमारी करने पहुंचे। मकसद बताया गया शराब की तलाश, लेकिन जब तलाशी के बाद कोई आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ तो भी कार्रवाई का ‘भौकाल’ खत्म नहीं हुआ। आरोप है कि पुलिस टीम एक व्यक्ति को गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गई और उसे छोड़ने के एवज में रुपये की मांग की गई।

मामला संग्रामपुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। परिजनों के मुताबिक दरोगा देव मोहन सिंह सादे कपड़ों में पिस्टल लेकर सिपाहियों के साथ ओमप्रकाश के घर पहुंचे थे। तलाशी के दौरान शराब या कोई अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ। इसके बावजूद ओमप्रकाश को गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया। परिजन कथित तौर पर रोते-बिलखते रहे और छोड़ने की गुहार लगाते रहे, लेकिन आरोप है कि उनकी फरियाद पर पुलिसकर्मियों ने गौर नहीं किया।

मामले ने तब तूल पकड़ा, जब परिजनों ने मोतीहारी एसपी स्वर्ण प्रभात से शिकायत की। शिकायत में पुलिस कार्रवाई और रुपये की कथित मांग को लेकर गंभीर इल्जाम लगाए गए। मीडिया कर्मियों ने भी पुलिस से कथित बरामद शराब की जानकारी और वीडियो मांगा, लेकिन आरोप है कि कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

एसपी के निर्देश पर अरेराज डीएसपी कुमारी प्रियंका ने पूरे मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट में ओमप्रकाश के घर से किसी आपत्तिजनक सामान की बरामदगी नहीं होने की बात सामने आई। साथ ही, जांच में यह भी सामने आया कि इसके बावजूद व्यक्ति को गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया और रुपये के लिए दबाव बनाने के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए गए।जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी ने संग्रामपुर थाना के दरोगा देव मोहन सिंह समेत तीन सिपाहियों को निलंबित कर दिया। निलंबित पुलिसकर्मियों में रवीं रंजन कुमार, अभय कुमार और हेमा कुमारी शामिल हैं।

अब सवाल सिर्फ चार पुलिसकर्मियों के निलंबन का नहीं, बल्कि उस कथित ‘भौकाल’ का है जिसमें तलाशी में कुछ नहीं मिला, फिर भी एक व्यक्ति को थाने ले जाने की नौबत आ गई। पुलिस की वर्दी कानून लागू करने की ताकत देती है, लेकिन अगर उसी ताकत पर रुपये के दबाव का इल्जाम लगे तो कार्रवाई खुद कठघरे में खड़ी हो जाती है। फिलहाल एसपी की कार्रवाई ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि पुलिसिया रौब के नाम पर मनमानी के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार