रेड लाइट एरिया से बरामदगी ने खोला तस्करी के गिरोह का काला खेल, घर से नाराज होकर निकली युवती को नौकरी का झांसा देकर बंगाल ले गया शख्स, फिर भागलपुर के बदनाम इलाके पहुंचाया, पुलिस ने कसा शिकंजा

Bihar Police:घर से नाराज होकर या किसी मजबूरी में बाहर निकली युवतियों और महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाले गिरोहों के खिलाफ मुजफ्फरपुर पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है।

Muzaffarpur Job Scam Exposes Trafficking Ring Woman Rescued
रेड लाइट एरिया से बरामदगी ने खोला तस्करी के गिरोह का काला खेल- फोटो : reporter

Bihar Police: घर से नाराज होकर या किसी मजबूरी में बाहर निकली युवतियों और महिलाओं को अपने जाल में फंसाने वाले गिरोहों के खिलाफ मुजफ्फरपुर पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक 648 युवतियों और महिलाओं को बिहार सहित दूसरे राज्यों से बरामद कर सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया गया है। इन बरामदगियों के दौरान ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें नौकरी, प्रेम और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर महिलाओं को कथित तौर पर मानव तस्करी के जाल में धकेला गया।हाल में मुजफ्फरपुर से गायब हुई एक युवती की बरामदगी ने पूरे मामले की भयावह तस्वीर सामने रख दी। बताया गया कि युवती किसी बात से नाराज होकर घर से निकल गई थी। शहर पहुंचने के बाद वह परेशान हालत में थी। इसी दौरान एक अनजान व्यक्ति ने उसे अपने विश्वास में लिया और काम दिलाने का झांसा देकर बंगाल ले गया। आरोप है कि इसके बाद युवती को बंगाल से भागलपुर के रेड लाइट इलाके तक पहुंचा दिया गया।मुजफ्फरपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवती को वहां से रेस्क्यू किया और सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाया। एक तरफ पुलिस के लिए यह बड़ी कामयाबी है, लेकिन दूसरी तरफ यह घटना उन गिरोहों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है जो घर से निकली महिलाओं को आसान निशाना समझकर अपने जाल में फंसाते हैं।

स्टेशन-बस स्टैंड से लेकर सोशल मीडिया तक फैला जाल

पुलिस जांच में सामने आए मामलों के मुताबिक, ऐसे गिरोह सिर्फ रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड के आसपास ही सक्रिय नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी युवतियों से संपर्क साधने की कोशिश करते हैं। पहचान छिपाकर फर्जी प्रोफाइल बनाई जाती हैं और नौकरी, प्रेम, आर्थिक मदद या बेहतर जिंदगी के सपने दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश होती है।घर से नाराज होकर निकलने वाली या किसी परेशानी से जूझ रही युवती जब अनजान शहर में पहुंचती है, तो ऐसे लोग उसकी मजबूरी को अपना हथियार बना लेते हैं। पहले मदद का भरोसा, फिर नौकरी या सुरक्षित ठिकाने का लालच और इसके बाद धीरे-धीरे उसे ऐसे चक्र में फंसाने का आरोप है, जहां से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।

‘एक गलत भरोसा जिंदगी बदल सकता है’—SSP की अपील

648 महिलाओं और युवतियों की बरामदगी के बीच मुजफ्फरपुर के SSP कांतेश कुमार मिश्रा ने महिलाओं और युवतियों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी परेशानी में घर छोड़ने या कोई बड़ा कदम उठाने से पहले परिवार और अपने भविष्य के बारे में जरूर सोचना चाहिए। अनजान व्यक्ति के भरोसे पर कहीं जाने से बचना चाहिए। SSP ने यह भी अपील की कि यदि परिवार में किसी तरह की परेशानी है या कोई व्यक्ति बहला-फुसलाकर, धमकाकर अथवा ब्लैकमेल कर रहा है, तो चुप रहने के बजाय तत्काल पुलिस से शिकायत करें। पुलिस हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।

648 रेस्क्यू, लेकिन चुनौती अभी बड़ी

मुजफ्फरपुर पुलिस की ओर से चलाया जा रहा विशेष अभियान निश्चित तौर पर बड़ी उपलब्धि है। लेकिन हर बरामदगी के पीछे एक सवाल भी छिपा है—आखिर कितनी युवतियां और महिलाएं अब भी ऐसे गिरोहों के निशाने पर हैं?घर से निकलने वाली हर युवती अपराधियों के लिए आसान शिकार न बने, इसके लिए पुलिस के साथ परिवार और समाज की भूमिका भी बेहद अहम है। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती, नौकरी या मदद के नाम पर मिलने वाले प्रस्ताव और अचानक कहीं बाहर जाने के दबाव को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।मुजफ्फरपुर पुलिस का यह अभियान सिर्फ 648 महिलाओं को घर पहुंचाने की कहानी नहीं, बल्कि उन अंधेरे नेटवर्क के खिलाफ चेतावनी भी है जो मजबूरी, भरोसे और सपनों को हथियार बनाकर महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा