Patna NEET student death: नीट छात्रा की मौत के रहस्य से उठने लगा पर्दा, एक हीं मिला लड़की और हॉस्टल मालिक मनीष रंजन के मोबाइल का लोकेशन, इलाज से लेकर डिस्चार्ज तक के कागज जब्त

पांच जनवरी को छात्रा ट्रेन से जहानाबाद से पटना आई थी। उसी दिन शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन, जो इस मामले में गिरफ्तार है, उसका भी मोबाइल लोकेशन जहानाबाद से पटना की ओर मूव करता पाया गया।

Patna NEET Student Death Mystery Deepens Hostel Owner Linked
नीट छात्रा की मौत के रहस्य से उठने लगा पर्दा- फोटो : social Media

Patna NEET student death: जहानाबाद की नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब महज़ इलाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि अस्पताल, हॉस्टल और सफ़र की हर कड़ी को जोड़ते हुए एसआईटी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। रविवार को एसआईटी की टीम राजेंद्रनगर रोड नंबर–1 स्थित प्रभात मेमोरियल हीरामती हॉस्पिटल पहुंची और वहां इलाज से लेकर डिस्चार्ज तक के तमाम काग़ज़ात खंगाल डाले। जांच टीम ने रिकॉर्ड जब्त कर लिया है और अब इलाज के तरीकों की मेडिकल एक्सपर्ट्स से फॉरेंसिक समीक्षा कराई जाएगी।

करीब डेढ़ घंटे तक डॉक्टरों से कड़ी पूछताछ हुई। डॉक्टरों ने बयान दिया कि छह जनवरी को छात्रा को बेहोशी की हालत में लाया गया, उसे तुरंत वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया और सभी मेडिकल प्रोटोकॉल अपनाए गए। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि परिजनों को आईसीयू में जाने की इजाजत दी गई थी और उनकी मर्ज़ी से ही छात्रा को दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। मगर परिजनों के आरोपों को एसआईटी ने संजीदगी से दर्ज कर अलग एंगल से जांच शुरू कर दी है।

इधर, फॉरेंसिक टीम ने छात्रा के कमरे की बाल की खाल निकालने वाली जांच की। हर कोना, हर सामान बारीकी से देखा गया। ज़रूरी नमूने इकट्ठा कर लिए गए हैं और छात्रा के कपड़ों को लैब भेजने की तैयारी है, ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ या ज़हरखुरानी के सुराग मिल सकें।

मामले ने तब और तूल पकड़ा जब मोबाइल लोकेशन का खेल सामने आया। पांच जनवरी को छात्रा ट्रेन से जहानाबाद से पटना आई थी। उसी दिन शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन, जो इस मामले में गिरफ्तार है, उसका भी मोबाइल लोकेशन जहानाबाद से पटना की ओर मूव करता पाया गया। सवाल यह है कि यह महज़ इत्तेफ़ाक़ है या फिर पहले से रची गई साज़िश? मनीष मूल रूप से जहानाबाद का रहने वाला है और पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है।

उधर, छात्रा का प्रारंभिक इलाज राजेंद्रनगर स्थित सहज अस्पताल में हुआ था। वहां भी पुलिस ने डॉक्टरों से पूछताछ की। डॉक्टरों ने बताया कि छात्रा को बेहोशी की हालत में लाया गया था, लेकिन आईसीयू की सुविधा न होने के कारण प्राथमिक इलाज और ज़रूरी दवाइयां देकर रेफर कर दिया गया।

अब इस केस में हर किरदार रेडार पर है। अस्पताल की भूमिका, हॉस्टल मालिक की चाल और सफ़र की टाइमलाइन सब कुछ जांच के घेरे में है। सवाल यही है यह मौत हादसा थी या किसी साज़िश का खामोश कत्ल?