AAP में 'राघव' का युग खत्म? राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए चड्ढा, इन्हें मिली पार्टी की जिम्मेदारी
आम आदमी पार्टी में बड़ा उलटफेर! राघव चड्ढा को राज्यसभा के डिप्टी लीडर पद से हटाया गया। डॉ. अशोक मित्तल होंगे नए उप-नेता। चड्ढा की चुप्पी और केजरीवाल से दूरियों पर उठे सवाल।
New Delhi - : आम आदमी पार्टी के 'पोस्टर बॉय' माने जाने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी ने एक बड़ा झटका दिया है। पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और अटकलों के बीच, AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर (उप-नेता) के पद से हटा दिया है । उनकी जगह अब लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर और सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है । इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक पत्र भी भेज दिया गया है ।
राघव की 'चुप्पी' और पार्टी से बढ़ती दूरियाँ
पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा और पार्टी आलाकमान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चलने के कयास लगाए जा रहे थे 。 गौर करने वाली बात है कि आबकारी नीति मामले में पार्टी के शीर्ष नेताओं को राहत मिलने के बाद भी राघव चड्ढा की न तो अरविंद केजरीवाल से कोई मुलाकात हुई और न ही उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पर कोई प्रतिक्रिया दी । उनकी इस रहस्यमयी 'चुप्पी' को पार्टी से बढ़ती दूरियों के स्पष्ट संकेत के तौर पर देखा जा रहा है ।
संसद में बोलने पर भी 'पाबंदी'?
सूत्रों के हवाले से एक चौंकाने वाली खबर यह भी आ रही है कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से आग्रह किया है कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए । पार्टी का यह रुख दिखाता है कि चड्ढा को न केवल नेतृत्व के पद से हटाया गया है, बल्कि उनकी संसदीय भूमिका को भी सीमित करने की कोशिश की जा रही है ।
कौन हैं नए डिप्टी लीडर डॉ. अशोक मित्तल?
राघव चड्ढा की जगह लेने वाले डॉ. अशोक कुमार मित्तल शिक्षा जगत का एक बड़ा नाम हैं और साल 2022 में पंजाब से राज्यसभा भेजे गए थे । संसद में कृषि और शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी तार्किक और शांत शैली के लिए पहचाने जाने वाले मित्तल अब राज्यसभा में पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे । अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या अशोक मित्तल की सौम्य कार्यशैली चड्ढा के आक्रामक तेवरों की कमी को पूरा कर पाएगी ।
राजनीतिक गलियारों में हलचल: क्या होगा राघव का अगला कदम?
पार्टी के इस बड़े फैसले के बाद राघव चड्ढा के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है । लंबे समय तक केजरीवाल के भरोसेमंद रहे चड्ढा का अचानक हाशिए पर जाना कई अनसुलझे सवाल खड़े करता है । क्या यह केवल एक संगठनात्मक फेरबदल है या राघव चड्ढा के लिए पार्टी के दरवाजे धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं? इसका जवाब आने वाले समय में ही मिलेगा।