आयुष इंटरवेंशन को मिलेगा ग्लोबल डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में स्थान, मंत्रालय ने शुरू की पांच दिवसीय इंटरनेशनल वर्कशॉप
भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान को लेकर बड़ी पहल हुई है। आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए डब्ल्यूएचओ-आईसीएचआई फ्रेमवर्क पर पांच दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की है....
Delhi : भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलने जा रही है। आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए डब्ल्यूएचओ-आईसीएचआई फ्रेमवर्क पर पांच दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की है। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के अनुसार, स्टैंडर्ड हेल्थ टर्मिनोलॉजी (मानक स्वास्थ्य शब्दावली) को शामिल करने से आयुष इंटरवेंशन बड़े डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम का एक अनिवार्य हिस्सा बनेंगे, जो आधुनिक हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स स्टैंडर्ड्स से पूरी तरह मेल खाएंगे।
कोडिंग से बढ़कर, यह पारंपरिक चिकित्सा के लिए गेम-चेंजर: वैद्य राजेश कोटेचा
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल सिर्फ एक सामान्य कोडिंग एक्सरसाइज नहीं है। उन्होंने कहा, "यह भारत के पारंपरिक मेडिकल सिस्टम को ग्लोबल साइंटिफिक, डिजिटल और पॉलिसी इकोसिस्टम में सम्मानजनक जगह दिलाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने वाला (गेम-चेंजर) कदम है।" यह प्रयास भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज फ्रेमवर्क और वैश्विक डिजिटल सूचना विज्ञान के साथ मजबूती से जोड़ेगा।
वैश्विक मानकों और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन पर विशेषज्ञों ने रखा पक्ष
कार्यशाला में आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और ग्लोबल हेल्थ सिस्टम में शामिल करने के दीर्घकालिक नीतिगत प्रभावों के बारे में विस्तार से बात की। वहीं, जीटीएमसी जामनगर की यूनिट हेड डॉ. गीता कृष्णन ने इसके वैश्विक संचालन के संदर्भ साझा किए। इसके अलावा, डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि व डेटा मानक और सूचना विज्ञान टीम के नेता डॉ. रॉबर्ट जैकब और सलाहकार डॉ. स्टीफन एस्पिनोसा ने भी प्रमुख भाषण दिए, जिन्होंने वैश्विक अंतरसंचालनीयता (इंटरऑपरेबिलिटी) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
सीसीआरएएस और एनआईआईएमएच हैदराबाद के सहयोग से हो रहा आयोजन
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा अपने विश्व स्वास्थ्य संगठन सहयोग केंद्र, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान, हैदराबाद के माध्यम से किया जा रहा है। यह आयोजन प्रमुख वैज्ञानिक विशेषज्ञों, संस्थागत प्रमुखों और अंतर्राष्ट्रीय सूचना विज्ञान पेशेवरों को एक मंच पर लाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड के वैज्ञानिक रूप से मजबूत और स्तरित पदानुक्रम को अंतिम रूप देना है।
सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए व्यापक कोड तैयार
आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क के तहत पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को गहराई से वर्गीकृत किया जा रहा है। इसमें 'सिद्ध' पद्धति के लिए 25 स्पेशलिटी, 130 थेरेपी और 996 प्रोसिजर (प्रक्रियाएं) तय की गई हैं। वहीं, 'यूनानी' पद्धति के लिए 15 स्पेशलिटी, 179 थेरेपी और 551 प्रोसिजर को शामिल किया गया है। इन सभी प्रक्रियाओं का मानकीकरण होने से वैश्विक डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और बीमा कंपनियों के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को समझना और अपनाना बेहद आसान हो जाएगा।