वोट डालना अनिवार्य है, नहीं किया मतदान तो होगी जेल ! सुप्रीम कोर्ट का याचिका बड़ा आदेश

याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से भी वंचित कर देना चाहिए. साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ दंड प्रावधान किया जाना चाहिए.

Compulsory voting
Compulsory voting- फोटो : news4nation

Compulsory voting : एक चर्चा अक्सर होती है कि वोट डालना जरूरी है या इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए. इसे लेकर मतदाताओं में भी कई किस्म की राय होती है. अब इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला दिया है. भारत में अनिवार्य मतदान लागू नहीं किया जा सकता है. यानी मतदाताओं को वोट डालने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई गरीब आदमी यह कहता है कि मुझे तो अपनी दिहाड़ी कमानी है, मैं वोट डालने कैसे जाऊँ? तो हम उससे क्या कहेंगे?"


सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर तमाम किस्म की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कहा है कि भी मतदाताओं को अनिवार्य रूप से वोट देने का बाध्यकारी निर्देश दिया जा सकता है. वोट डालने को अनिवार्य बनाने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को याचिका ख़ारिज कर दी.  


याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से भी वंचित कर देना चाहिए. साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ दंड प्रावधान किया जाना चाहिए. हालांकि CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते. वोट डालने पर कड़ा रुख नहीं अपनाया जा सकता. पीठ ने साफ कहा कि लोकतंत्र में मतदाताओं से वोट डालने की अपेक्षा की जाती न कि किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर किया जा सकता है. 


कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि ज्यादा से ज्यादा मतदान हो इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए. न कि मतदाताओं को आदेश जारी करना चाहिए और कानून बनाना चाहिए कि आप वोट डालने के लिए मजबूर हैं. वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया था कि अदालत चुनाव आयोग को अनिवार्य मतदान के लिए दिशानिर्देश बनाने और बिना वैध कारण वोट न देने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दे. हालांकि पीठ ने याचिका को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया. 


इस दौरान पीठ में मौजूद जस्टिस जॉयमाल्य बागची का उदाहरण देते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा, अगर हम इस याचिका को स्वीकार कर लेते हैं और ये मान लेते हैं, तो मेरे भाई-साथी जस्टिस बागची को भी पश्चिम बंगाल जाना पड़ेगा और वहां जाकर वोट डालना होगा, भले ही यहां उस दिन काम-काज का दिन हो." इसी बीच जस्टिस बागची ने कहा, "न्यायिक कार्य भी तो जरूरी है." सीजेआई ने याचिकाकर्ता पर चुटकी लेते हुए कहा कि  अगर बागची वोट डालने नहीं जाते  तो क्या हमें उनकी गिरफ्तारी वगैरह का आदेश देना चाहिए? एक ऐसा देश जो कानून के राज से चलता है और लोकतंत्र में विश्वास रखता है, और हमने पिछले 75 सालों में यह दिखाया भी है कि हम इस पर कितना भरोसा करते हैं, वहाँ सभी से यह उम्मीद की जाती है कि वे वोट डालने जाएँ. अगर वे नहीं जाते हैं तो न जाएं. इसलिए, बस जागरूकता की जरूरत है. लेकिन हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते.