पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन: IAF पायलट से CWG के 'किंगपिन' तक, विवादों और उपलब्धियों से भरा रहा 81 साल का सफर

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का 81 वर्ष की आयु में निधन। पुणे के अस्पताल में ली अंतिम सांस। IAF पायलट से लेकर CWG घोटाले तक, ऐसा रहा सफर

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन: IAF पायलट से CW

Patna - पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कलमाड़ी ने मंगलवार सुबह करीब 3:30 बजे पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को दोपहर 2 बजे तक उनके निवास 'कलमाड़ी हाउस' (एरंडवणे) में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। उनका अंतिम संस्कार दोपहर 3:30 बजे वैकुंठ श्मशान घाट, पुणे में संपन्न होगा।

वायुसेना से राजनीति तक का सफर

1 मई 1944 को जन्मे सुरेश शामराव कलमाड़ी का करियर बेहद विविधतापूर्ण रहा। 1960 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से जुड़ने के बाद वे भारतीय वायुसेना में पायलट बने। 1964 से 1972 तक सक्रिय पायलट रहने के बाद उन्होंने NDA में इंस्ट्रक्टर के तौर पर भी सेवा दी। वायुसेना से स्क्वाड्रन लीडर के पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी के जरिए राजनीति में कदम रखा। वे पुणे लोकसभा सीट से तीन बार सांसद चुने गए और रेल राज्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।

खेल प्रशासन में दबदबा और CWG का आयोजन

कलमाड़ी केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि खेल जगत के भी बड़े नाम रहे। वे लंबे समय तक भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष रहे। उनके करियर का सबसे बड़ा पड़ाव 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) था, जिसकी आयोजन समिति के वे चेयरमैन थे।

विवाद: 15 साल तक चला कानूनी संघर्ष

कलमाड़ी का नाम राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) के दौरान हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार मामले में उछला। उन पर स्विस टाइमकीपिंग कंपनी को गलत तरीके से ठेका देने और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगे। अप्रैल 2011 में CBI ने उन्हें गिरफ्तार किया, जिसके बाद वे 10 महीने तिहाड़ जेल में रहे। इसी विवाद के कारण कांग्रेस ने उन्हें निलंबित भी कर दिया था। हालांकि, 15 साल चले लंबे कानूनी केस के बाद, अप्रैल 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था।