संसद में गरजे राजद सांसद संजय यादव: बोले- 'यह सुधार नहीं, 'दुत्कार एक्सप्रेस' है; 20 लोग देश चला रहे और 20 मिलियन रोटी को तरस रहे'
राज्यसभा सांसद संजय यादव ने संसद में बजट पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने वर्तमान बजट को आम आदमी की आफत बताते हुए देश में बढ़ती आर्थिक खाई और बेरोजगारी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
New Delhi - संसद के बजट सत्र के दौरान राजद के राज्यसभा सांसद संजय यादव ने केंद्र सरकार के आम बजट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बजट में जनता की हिफाजत के बजाय आफत अधिक नजर आ रही है। यादव ने इसे आम आदमी की आमदनी घटाने वाला और समस्याओं को बढ़ाने वाला बजट करार देते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए।
सांसद ने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था मात्र 20 बड़े उद्योगपतियों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "देश के 20 लोग अर्थव्यवस्था को Define कर रहे हैं और बाकी देशवासी सरकार की कुनीतियों का Fine भर रहे हैं।" यादव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जहां 20 लोग पूरा देश खरीदने की ताकत रखते हैं, वहीं 20 मिलियन गरीब दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए संजय यादव ने कहा कि बजट में युवाओं को नौकरी देने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के शब्दकोश से गाँव, गरीब, किसान और नौजवान गायब हो चुके हैं। जब ये शब्द ही उनके शब्दकोश में नहीं हैं, तो सरकार की नीतियों और निर्णयों में इनका स्थान होना नामुमकिन है।
वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से तुलना करते हुए राजद सांसद ने कहा कि चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था होने का दावा तब तक खोखला है जब तक प्रति व्यक्ति आय में सुधार न हो। उन्होंने बताया कि भारत में शीर्ष 1% अमीरों के पास देश की 40% संपत्ति है, जबकि 81 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां केवल उन 1% अमीरों के लिए बनती हैं, जो भाजपा को 90% चंदा देते हैं, ताकि 90% आबादी का शोषण किया जा सके।
अंत में, संजय यादव ने सरकार की 'सुधार एक्सप्रेस' पर कटाक्ष करते हुए उसे 'दुत्कार एक्सप्रेस' बताया। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को दुत्कार कर देश का सुधार संभव नहीं है। सांसद ने सुझाव दिया कि सरकार को 'सुधार एक्सप्रेस' से पहले 'सत्कार और दुलार एक्सप्रेस' चलाने की आवश्यकता है, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
Report - ranjan kumar