'गुलाब जामुन जैसा है सरकार का विकास': राजद सांसद संजय यादव ने संसद में खोली ग्रामीण भारत की बदहाली की पोल

राजद सांसद संजय यादव ने संसद में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यों पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार को जमकर घेरा और बिहार की बदहाली के आंकड़े पेश किए। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया।

 'गुलाब जामुन जैसा है सरकार का विकास': राजद सांसद संजय यादव

Patna - राजद सांसद संजय यादव ने सदन में भावुक और आक्रामक अंदाज़ में अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है, लेकिन आज वही आत्मा उपेक्षा और ना-उम्मीदी के बोझ तले कराह रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि ग्रामीणों और किसानों को सिर्फ फाइलों और घोषणाओं तक सीमित कर दिया गया है। यादव ने कहा कि गाँव अब उत्पादन के केंद्र नहीं, बल्कि पलायन के केंद्र बन गए हैं। देश की लगभग 29% आबादी प्रवासी है, जिनमें से 89% ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जो रोजगार की तलाश में शहरों में दिहाड़ी मजदूर बनने को मजबूर हैं।

5 किलो अनाज और गरीबी का विरोधाभास

संजय यादव ने सरकार के गरीबी उन्मूलन के दावों पर तीखा प्रहार करते हुए इसे एक बड़ा विरोधाभास बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश से गरीबी खत्म हो रही है, तो सरकार 81 करोड़ भारतीयों को जीवित रहने के लिए 5 किलो मुफ्त अनाज क्यों दे रही है? सांसद के अनुसार, केवल न्यूनतम आवश्यकता पूरी करना विकास नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोधाभास सरकार के ग्रामीण विकास मॉडल की सबसे बड़ी विफलता को दर्शाता है, जहाँ लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय केवल "लाभार्थी" बनाकर छोड़ दिया गया है।

बिहार में आवास योजना की सुस्त रफ्तार

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का जिक्र करते हुए संजय यादव ने बिहार की जमीनी हकीकत पेश की। उन्होंने बताया कि बिहार की 14% आबादी आज भी कच्चे घरों में रहती है और लगभग 1 करोड़ 4 लाख 90 हजार परिवारों के पास पक्का घर नहीं है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए बिहार को 12 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य मिला था, लेकिन अब तक मात्र 2.85 लाख आवास ही बन पाए हैं। उन्होंने राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री के हवाले से कहा कि केंद्र सरकार से इस योजना में पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है, जिससे 9 लाख आवासों का कोई अता-पता नहीं है।

मनरेगा की अनदेखी और गांधी का 'अपमान'

सांसद ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) में काम की कमी और भुगतान में देरी को एक गंभीर समस्या बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मनरेगा से गांधी का नाम और प्रभाव कम करना कोई संयोग नहीं है। उन्होंने 11 साल पुराने खादी कैलेंडर विवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि ग्रामीण रोजगार की इस महत्वपूर्ण योजना को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। उनके अनुसार, बिहार में अत्यधिक ग्रामीण बेरोजगारी दर और नीति आयोग द्वारा बिहार को सबसे गरीब राज्य घोषित करना सरकार की विफलता का प्रमाण है।

"गुलाब जामुन" विकास पर कटाक्ष

भाषण के अंत में संजय यादव ने सरकार के विकास मापने के पैमाने पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी को आंकड़ों से गायब कर दिया गया है और गरीबी को "लाभार्थी" शब्द के पीछे छुपा दिया गया है। उन्होंने एक चर्चित मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा कि सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में गाँवों और गरीबों का उतना ही "विकास" होता है, जितना 'गुलाब जामुन' में गुलाब और जामुन होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहरों की चमक तभी बढ़ती है जब गाँव विकास को तरसते हैं और ग्रामीण तड़पते हैं।

Report - Ranjan kumar