उद्धव ठाकरे की शिवसेना में टूट की आशंका!
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी हलचल देखने को मिल रही है, जहां शिवसेना (UBT) के सांसदों के संभावित दलबदल की अटकलों के बीच पार्टी ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सख्त कार्रवाई और दल-बदल कानून के पालन की मांग की है।
नई दिल्ली : महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिवसेना (UBT) के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने की अटकलों के बीच पार्टी ने मोर्चा संभाल लिया है। बुधवार को शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला और संभावित दलबदल को लेकर चिंता जाहिर की।
प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राज्यसभा सांसद संजय राउत शामिल थे। पार्टी नेताओं ने स्पीकर से आग्रह किया कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाए और किसी भी गैर-कानूनी राजनीतिक विलय को मान्यता न दी जाए।
क्यों बढ़ी उद्धव ठाकरे की चिंता?
दरअसल, शिवसेना (UBT) के लोकसभा में कुल 9 सांसद हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इनमें से 6 से 7 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
हालांकि पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ने सार्वजनिक रूप से उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की है। इसके बावजूद बाकी सांसदों को लेकर अटकलों का दौर जारी है।
स्पीकर से क्या बोले अनिल देसाई?
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद अनिल देसाई ने कहा कि उन्होंने एक लिखित प्रतिनिधित्व सौंपा है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी समूह के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने के बावजूद वह अपने स्तर पर किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता।
देसाई ने कहा कि कानून के अनुसार केवल मूल राजनीतिक दल ही किसी दूसरे दल के साथ विलय का निर्णय ले सकता है। ऐसे में यदि कोई समूह खुद को दो-तिहाई बहुमत वाला बताकर किसी अन्य पार्टी में शामिल होने की कोशिश करता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलनी चाहिए।
संजय राउत का बड़ा आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। राउत का दावा है कि पार्टी के सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी रकम का लालच दिया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि सांसदों को 50 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया जा रहा है और शुरुआती भुगतान के तौर पर 15 करोड़ रुपये दिए जाने की भी चर्चा है।
राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की राजनीति में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और चुने हुए जनप्रतिनिधियों को धनबल के जरिए प्रभावित किया जा रहा है।
शिंदे बनाम ठाकरे: जारी है राजनीतिक संघर्ष
2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद से ही उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच राजनीतिक संघर्ष लगातार जारी है। पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संसद तक पहुंच चुका है।
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को चुनाव आयोग और अदालतों से बड़ी राहत मिल चुकी है। वहीं उद्धव ठाकरे लगातार अपने राजनीतिक आधार और संगठन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
ऐसे में यदि लोकसभा के सांसदों का एक बड़ा समूह भी शिंदे खेमे में चला जाता है तो यह उद्धव ठाकरे की राष्ट्रीय राजनीति में मौजूद ताकत को कमजोर कर सकता है।
लोकसभा स्पीकर ने क्या कहा?
संजय राउत के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें आश्वस्त किया है कि यदि इस तरह का कोई मामला उनके समक्ष आता है तो वह संविधान, दल-बदल विरोधी कानून और सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही फैसला करेंगे।
राउत ने कहा कि स्पीकर ने निष्पक्षता का भरोसा दिया है और कहा है कि किसी भी निर्णय से पहले सभी तथ्यों और नियमों की जांच की जाएगी।
महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या होगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शिवसेना (UBT) के सांसदों में टूट होती है तो इसका सीधा असर महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति पर पड़ेगा। महाविकास अघाड़ी की रणनीति, उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्थिति और 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारी पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।
फिलहाल सभी की नजर संभावित दलबदल की अटकलों और लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल सकता है।