B. FARMA : फार्मासिस्ट बहाली पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम मुहर, बी.फार्मा डिग्रीधारियों की पुनर्विचार याचिका खारिज, डिप्लोमा ही अनिवार्य योग्यता

B. FARMA : सुप्रीम कोर्ट ने फार्मासिस्ट की अनिवार्य योग्यता डिप्लोमा इन फार्मेसी रखने के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज की।

B. FARMA : फार्मासिस्ट बहाली पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम मुहर,
बी फार्मा डिग्रीधारियों को राहत - फोटो : SOCIAL MEDIA

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसले को बरकरार रखते हुए बी फार्मा डिग्रीधारियों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका खारिज की। सुप्रीम कोर्ट ने फार्मासिस्ट की अनिवार्य योग्यता डिप्लोमा इन फार्मेसी रखने के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज की।सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिए गए फैसले पर किसी भी तरह का विचार करने से किया साफ इंकार । सुप्रीम कोर्ट के फैसले का डिप्लोमा फार्मासिस्ट आर्गनाइजेशन, छात्र संघ, बिहार ने आभार  जताया और धन्यवाद ज्ञापन किया। सुप्रीम कोर्ट ने यह पुनः माना कि फार्मासिस्ट की तय शैक्षणिक योग्यता सिर्फ डिप्लोमा इन फार्मेसी ही है। 

सुप्रीम कोर्ट  ने बी फार्मा, एम फार्मा  एवं फार्मा डी डिग्रीधारियों के द्वारा दायर अपील में दिनांक 16 जनवरी को दिए गए अपने पूर्ववर्ती निर्णय की समीक्षा हेतु दायर पुनर्विचार याचिका को आज खारिज कर दिया और अपने द्वारा दिए गए पूर्ववर्ती आदेश को बिल्कुल सही ठहराया है। गौरतलब हैं कि बिहार में फार्मासिस्ट पद पर भर्ती के लिए फार्मेसी में डिप्लोमा होना जरूरी माना है। 

सुप्रीम कोर्ट ने फार्मासिस्ट पद के लिए फार्मेसी में डिप्लोमा की अनिवार्यता के बिहार सरकार के नियम को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट पटना हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सभी अपीलें खारिज कर दी थी। पटना हाई कोर्ट ने 10 अप्रैल ,2025 को दिए फैसले में फार्मासिस्ट पद के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी की योग्यता की अनिवार्यता के नियम को सही ठहराया था।बी फार्मा और एम फार्मा करने वाले लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। 

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने को पटना हाई कोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार में फार्मासिस्ट की भर्ती योग्यता को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया था।