Maghi Purnima 2026: माघी पूर्णिमा पर आस्था की रोशनी में गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, स्नान-दान से खुला पुण्य का दरवाज़ा, 32 पूर्णिमा जितनी होती है फलदायी...

Maghi Purnima 2026: आज माघी पूर्णिमा का पावन पर्व पूरे श्रद्धा और रूहानी एहसास के साथ मनाया जा रहा है। शुक्ल पक्ष की यह पूर्णिमा सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, संयम और आत्मशुद्धि का मुक़ाम मानी जाती है।

Maghi Purnima Devotees Throng Ganga for Holy Dip
माघी पूर्णिमा पर आस्था की रोशनी में गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़- फोटो : reporter

Maghi Purnima 2026: आज माघी पूर्णिमा का पावन पर्व पूरे श्रद्धा और रूहानी एहसास के साथ मनाया जा रहा है। शुक्ल पक्ष की यह पूर्णिमा सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, संयम और आत्मशुद्धि का मुक़ाम मानी जाती है। हर महीने आने वाली बारह पूर्णिमाओं में माघ मास की पूर्णिमा को विशेष दर्जा हासिल है, जिसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है। इसकी परंपरा आज की नहीं, बल्कि सदियों पुरानी है, जब ऋषि-मुनि इसी दिन तप, जप और साधना से अपने जीवन को पवित्र करते थे।

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक माघी पूर्णिमा के दिन किया गया स्नान, दान और पूजन कई गुना फल देने वाला होता है। इसी यक़ीन के साथ आज तड़के से ही श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों में डुबकी लगाने पहुंचे। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा बरसती है और मनुष्य के पाप कटकर पुण्य का खज़ाना भर जाता है।

पुराणों में भी माघ मास के महत्व का विस्तार से ज़िक्र मिलता है। जो साधक माघ महीने में कल्पवास करते हैं, वे माघी पूर्णिमा के दिन अंतिम स्नान कर अपने व्रत और तपस्या का समापन करते हैं। प्रयागराज में लगने वाला प्रसिद्ध माघ मेला भी इसी दिन पूर्ण होता है। स्नान के साथ-साथ दान और मंत्र जाप का भी विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस पावन अवसर पर भागलपुर में आस्था और अनुशासन का खूबसूरत संगम देखने को मिला। गंगा स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु सुबह से ही घाटों पर उमड़ पड़े। बरारी सीढ़ी घाट, जहाज़ घाट और कहलगांव के बटेश्वर घाट पर भक्त स्नान, पूजा और ध्यान में लीन नजर आए। हर ओर “हर-हर गंगे” के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो उठा।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। आपदा मित्र, एनडीआरएफ की टीमें, प्रशिक्षित गोताखोर और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुचारु रखा गया, प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन कर भीड़ को नियंत्रित किया गया। प्रशासन की सूझबूझ और सतर्कता का ही नतीजा रहा कि माघी पूर्णिमा का यह मुक़द्दस पर्व पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ जहां आस्था भी सलामत रही और इंतज़ाम भी।

रिपोर्ट - अंजनी कुमार कश्यप