Bihar Mahashivratri: महाशिवरात्रि का महापर्व , भोलेनाथ की कृपा की महा-रात! चार पहर पूजन से खुलेगा मोक्ष का द्वार, पटना में शिव-भक्ति का महासागर
Bihar Mahashivratri: वैदिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पावन पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। ...
Bihar Mahashivratri: वैदिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पावन पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिव्य तिथि पर देवों के देव महादेव का प्राकट्य हुआ था और इसी शुभ रात भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था। शास्त्रों में वर्णित है कि जो साधक इस दिन व्रत रखकर सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करता है, उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को पूरे विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा।
धर्मशास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात चार पहर का पूजन विशेष फलदायी माना गया है।
प्रथम प्रहर का पूजन 15 फरवरी को शाम 6:11 बजे से 9:22 बजे तक रहेगा।
द्वितीय प्रहर की पूजा 9:23 बजे से 16 फरवरी की रात 12:34 बजे तक होगी।
तृतीय प्रहर का पूजन रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक संपन्न होगा।
चतुर्थ और अंतिम प्रहर की पूजा सुबह 3:46 बजे से 6:59 बजे तक की जाएगी।
वहीं निशिथ काल का विशेष पूजन समय रात 12:09 से 1:01 बजे तक रहेगा, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए, जो अनंत और निराकार है। यह रात्रि कुंडलिनी जागरण, ध्यान और आत्मबोध के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है, जो साधक को परम ज्ञान की ओर ले जाती है।
इधर, पटना में महाशिवरात्रि को लेकर भव्य तैयारियां की गई हैं। श्री श्री महाशिवरात्रि महोत्सव शोभायात्रा अभिनंदन समिति की ओर से राजधानी में विशाल महोत्सव का आयोजन होगा। शहर भर से 31 शोभायात्राएं और शिव-बारात झांकियां निकाली जाएंगी। भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, नंदी और शिवगणों की सजीव झांकियां श्रद्धालुओं को भाव-विभोर करेंगी।
महाशिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, भांग, धतूरा और आक के फूल अर्पित कर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और रात्रि जागरण कर भोलेनाथ की आराधना करें क्योंकि यही रात है, जब भोले भंडारी अपने भक्तों पर कृपा की वर्षा करते हैं।