Bihar Teacher News: बिहार के सरकारी शिक्षकों के इंक्रीमेंट पर सरकार ने लगाई मुहर, इन टीचर्स को होगा दोहरा फायदा, बम-बम हुए गुरुजी
बिहार की राजनीति में जब भी शिक्षा की बात होती है, तो अक्सर वादों की गूंज सुनाई देती है, अमल की आहट कम। लेकिन इस बार सरकार ने स्कूल की दहलीज़ तक राहत की सांस भर दी है।
Bihar Teacher News:बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) से चयनित 5867 शिक्षकों के लंबे अरसे से अटके इंक्रीमेंट की प्रक्रिया आखिरकार शुरू हो गई है। जिला शिक्षा विभाग और जिला स्थापना शाखा ने फाइलों की धूल झाड़कर काम को जंग-ए-मैदान की रफ्तार दे दी है।भागलपुर के 5867 शिक्षकों के इंक्रीमेंट पर जमी बर्फ पिघली है। बिहार की राजनीति में जब भी शिक्षा की बात होती है, तो अक्सर वादों की गूंज सुनाई देती है, अमल की आहट कम। लेकिन इस बार भागलपुर से आई खबर ने सियासी गलियारों से लेकर स्कूल की दहलीज़ तक राहत की सांस भर दी है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यह काम अब “युद्ध स्तर” पर किया जा रहा है। सरकार का फरमान है कि चार दिनों के भीतर पूरे जिले के शिक्षकों का इंक्रीमेंट अपडेट कर दिया जाए, ताकि जिनकी जेब पर महीनों से कैंची चल रही थी, उनकी भरपाई हो सके। हर महीने तीन से चार हजार रुपये का नुकसान झेल रहे शिक्षक अब राहत की उम्मीद में हैं।
आंकड़ों की जुबान में बात करें तो टीआरई-1 के तहत चयनित 3316 शिक्षकों को दो-दो इंक्रीमेंट मिलेंगे। टीआरई-2 के 1738 शिक्षकों के खाते में भी दो इंक्रीमेंट जुड़ेंगे, जबकि टीआरई-3 के 813 शिक्षकों को एक इंक्रीमेंट का फायदा मिलेगा। यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मनोबल का भी सवाल था।
जिला स्थापना शाखा के बड़े बाबू का कहना है कि इस बार इंक्रीमेंट को सीधे वेतन भुगतान से जोड़ा गया है, इसलिए काम में तेजी आई है। अब तक जिले के आठ प्रखंडों में करीब 40 प्रतिशत शिक्षकों का इंक्रीमेंट लगाया जा चुका है। साथ ही उनके वेतन बिल ट्रेजरी भेजने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। बाकी प्रखंडों का काम भी जल्द निपटाने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, एचआरएमएस पोर्टल पर एक-एक कर इंक्रीमेंट अपडेट करना आसान नहीं है। सर्वर की सुस्ती परेशानी बन रही है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इस बार किसी भी कीमत पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। गौरतलब है कि बिहार के 37 जिलों में यह काम पहले ही निपट चुका था और भागलपुर सबसे पीछे छूट गया था।
अब जबकि यहां भी फाइलें चल पड़ी हैं, शिक्षकों में खुशी और सुकून का माहौल है। सियासत की जुबान में कहें तो यह फैसला तालीम के मैदान में सरकार की साख बचाने की कोशिश है—जहां देर से ही सही, इंसाफ़ की दस्तक तो हुई।