Bihar Teacher Promotion: नीतीश सरकार का शिक्षक हित में बड़ा फैसला, ढाई लाख शिक्षकों को इस दिन से मिलेगा प्रमोशन, साथ हीं मिलेगी सेवा निरंतरता

Bihar Teacher Promotion:बिहार की शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से उठ रही मांग पर आखिरकार सरकार ने मुहर लगा दी है।

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नीतीश सरकार का शिक्षक हित में बड़ा फैसला- फोटो : social Media

Bihar Teacher Promotion:बिहार की शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से उठ रही मांग पर आखिरकार सरकार ने मुहर लगा दी है। राज्य के करीब ढाई लाख विद्यालय अध्यापक और विशिष्ट शिक्षकों के लिए यह खबर किसी राहत की सांस से कम नहीं है। अब प्रमोशन के दौरान शिक्षकों की सेवा निरंतरता का लाभ मिलेगा, यानी नियोजित शिक्षक के तौर पर किए गए कार्यकाल को भी प्रोन्नति में जोड़ा जाएगा। शिक्षा विभाग के सचिव दिनेश कुमार ने इस संबंध में सोमवार को औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।

सियासी नजरिए से देखें तो यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उस वर्ग के प्रति सरकार का भरोसा लौटाने की कोशिश है, जो वर्षों से अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ता रहा है। नियोजित शिक्षक से विशिष्ट शिक्षक बने लोगों के लिए यह आदेश खास मायने रखता है, क्योंकि अब उनका पूर्व सेवाकाल बेकार नहीं जाएगा, बल्कि प्रमोशन की सीढ़ी में गिना जाएगा।

बिहार सरकार ने पहले ही बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक (नियुक्ति, स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवाशर्त) संशोधन नियमावली 2023 के तहत प्रोन्नति की रूपरेखा तय कर दी थी। इसके अनुसार, छठी से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले विद्यालय अध्यापकों की प्रोन्नति इन्हीं कक्षाओं के लिए वरीय विद्यालय अध्यापक के पद पर और 11वीं–12वीं के अध्यापकों की प्रोन्नति इन्हीं कक्षाओं के वरीय अध्यापक के पद पर की जाएगी।

इसी तरह बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 के तहत भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है। छठी से आठवीं कक्षा के विशिष्ट शिक्षक अब वरीय विशिष्ट शिक्षक बनेंगे और 11वीं–12वीं के विशिष्ट शिक्षक अपनी ही कक्षाओं में वरीय पद पर पदोन्नत होंगे। अब नए आदेश के बाद इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम बदलाव यह हुआ है कि नियोजित शिक्षक के दौर का अनुभव भी गिना जाएगा।

शिक्षक संगठनों के लिए यह फैसला लंबे संघर्ष की जीत की तरह देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे नीतीश सरकार की उस नीति के तौर पर पेश किया जा रहा है, जिसमें “काम का सम्मान” और “अनुभव की कद्र” को प्राथमिकता दी जाती है। इससे न सिर्फ शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता और गुणवत्ता भी आएगी।

कुल मिलाकर, यह निर्णय शिक्षा के मैदान में सरकार का स्पष्ट संदेश है जो सेवा देगा, उसका अनुभव गिना जाएगा। अब देखना यह है कि यह भरोसा ज़मीन पर कितनी तेजी और पारदर्शिता से उतरता है, लेकिन फिलहाल बिहार के शिक्षकों के चेहरे पर उम्मीद की रौशनी साफ दिख रही है।