Bihar School News: बिहार में सरकार की नाक के नीचे शिक्षा का मंदिर बना लापरवाही का अड्डा, स्कूल खाली,गुरुजी के इंतजार में बच्चे, अधिकारी मौन

Bihar School News: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हालात ये है कि सरकार के नाक के नीचे गुरु जी अपना कानून चलाते हैं।..

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शिक्षा का मंदिर बनना लापरवाही का अड्डा- फोटो : reporter

Bihar School News: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है। हालात ये है कि सरकार के नाक के नीचे गुरु जी अपना कानून चलाते हैं। समय पर पहुंचना तो दूर उलटे धौंस भी जमाते हैं।ताजा मामला घोषवारी प्रखंड के कड़रा गांव के सरकारी स्कूल से सामने आया है, जहां शिक्षा व्यवस्था मानो पूरी तरह पटरी से उतरती दिखाई दी।

सरकारी नियमों के मुताबिक मॉर्निंग शिफ्ट में स्कूल का समय सुबह 6:30 बजे से 11:30 बजे तक तय है। लेकिन कदरा गांव के मध्य विद्यालय में सुबह 7:20 बजे तक पूरा परिसर सूना पड़ा था। बच्चे समय पर स्कूल पहुंच चुके थे, मगर गुरुजी का कहीं अता-पता नहीं था।

जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची और शिक्षकों से सवाल किया तो जिम्मेदारी लेने के बजाय एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया। एक शिक्षिका टीना कुमारी ने माना कि आम तौर पर शिक्षक 7 बजे तक आते हैं, लेकिन आज देर हो गई। करीब 7:18 बजे वह खुद स्कूल पहुंचीं और देरी का कारण पैदल आना बताया। इसके बाद 7:22 बजे शिक्षक रंजीत कुमार स्कूल पहुंचे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि वे मुंह में गुटखा खाए हुए थे। शिक्षा के मंदिर में इस तरह का व्यवहार बच्चों के लिए क्या संदेश देता है, यह सवाल अब गांव में चर्चा का विषय बन गया है। तीसरे शिक्षक दीपक कुमार भी करीब 7:22 बजे पहुंचे और उन्होंने कहा कि प्रभारी जयंत कुमार ने ही 7 बजे के बाद आने को कहा था। लेकिन जब प्रभारी की बात हुई तो वे खुद मौके से नदारद पाए गए। इतना ही नहीं, दो महिला शिक्षिकाएं सुबह 8 बजे के बाद स्कूल पहुंचीं। मीडिया ने जब उनसे सवाल पूछना चाहा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप स्कूल के अंदर चली गईं।

इस पूरे मामले से गांव के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बोर्ड परीक्षा में छात्र एक मिनट देर से पहुंचे तो उन्हें परीक्षा देने नहीं दिया जाता, लेकिन शिक्षक घंटों देर से आएं तो उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती।जब इस मामले पर पटना के शिक्षा विभाग के अधिकारी और स्थानीय बीईओ धर्मवीर कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। चूंकि स्कूल में बायोमेट्रिक अटेंडेंस होती है, इसलिए रिकॉर्ड की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह है कि क्या यह जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या सच में कड़रा गांव के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कोई सख्त कदम उठाया जाएगा।

बाढ़ से रविशंकर कुमार की रिपोर्ट