Bihar Diwas: बिहार का गौरवशाली इतिहास, जानिए वो 6 बातें जो इसे बनाती हैं खास...

बिहार को लोग अक्सर पिछड़ेपन से जोड़ के देखते हैं, लेकिन आपको बता दें कि बिहार का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। आज हम आपको ऐसी 6 बातें बताएंगे जिससे आपको बिहार के गौरवशाली इतिहास और विरासत पर गर्व होगा।

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Bihar Diwas: बिहार दिवस हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है, जो बिहार के गठन और इसकी समृद्ध विरासत का प्रतीक है। बिहार 1912 में बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर एक स्वतंत्र राज्य बना और तब से इसने शिक्षा, संस्कृति, राजनीति और धर्म के क्षेत्र में अपनी अनूठी पहचान बनाई है। बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास की विरासत है। आइए जानते हैं बिहार की उन 6 खास बातों के बारे में, जो इसे भारत का एक अनूठा और गौरवशाली राज्य बनाती हैं।



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1. नालंदा विश्वविद्यालय: दुनिया का सबसे पुराना शिक्षा केंद्र

बिहार प्राचीन काल से ही शिक्षा का केंद्र रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक था, जहां ग्रीस, जापान, कोरिया, फारस और चीन जैसे देशों से छात्र शिक्षा प्राप्त करने आते थे। नालंदा के पुस्तकालय में लाखों ग्रंथ थे, जिन्हें 12वीं शताब्दी में बख्तियार खिलजी की सेना ने आग लगा दी थी। कहा जाता है कि इस पुस्तकालय में आग तीन महीने तक जलती रही। विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी बिहार में ही स्थित था, जो उस समय तिब्बत और दक्षिण एशिया के विद्वानों के लिए मुख्य शिक्षा केंद्र था। इन दोनों विश्वविद्यालयों ने बिहार को शिक्षा और ज्ञान का केंद्र बनाया।

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2. मिथिला पेंटिंग: कला की अमूल्य विरासत

मधुबनी (मिथिला) पेंटिंग बिहार की पहचान का अहम हिस्सा है। सदियों से चली आ रही इस कला परंपरा को मुख्य रूप से महिलाएं दीवारों और कागज पर बनाती थीं। ये पेंटिंग धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को दर्शाती हैं और आज भी देश-विदेश में मशहूर हैं। मिथिला पेंटिंग का अद्भुत संयोजन रंगों और भावनाओं को दर्शाता है, जो बिहार की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखता है। भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ भी बिहार के सारनाथ में स्थित अशोक के सिंह स्तंभ से प्रेरित है।



3. धर्मों की जन्मस्थली: बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म की जड़ें

बिहार ने कई महान धर्मों को जन्म दिया है। गौतम बुद्ध को बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यहीं से बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई थी। महावीर स्वामी ने बिहार में ही जैन धर्म का प्रसार किया था। इसके अलावा सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म भी पटना में ही हुआ था। बिहार की धरती ने दुनिया को अहिंसा और शांति का संदेश दिया। बोधगया, राजगीर और वैशाली जैसी जगहें आज भी धर्म और आध्यात्म का केंद्र मानी जाती हैं।


4. भाषाओं और बोलियों का संगम

बिहार अपनी भाषाओं की विविधता के लिए भी जाना जाता है। यहां हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और वज्जिका जैसी भाषाएं बोली जाती हैं। बिहार की प्रमुख भाषाओं में से एक मैथिली को 2003 में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। मैथिली साहित्य में विद्यापति जैसे महान कवि हुए हैं, जिन्हें मैथिल कवि कोकिल कहा जाता है। इसके अलावा भोजपुरी ने सिनेमा और संगीत के जरिए भी अपनी खास पहचान बनाई है।



5. मौर्य और गुप्त वंश की भूमि: सम्राटों की गौरवशाली गाथा

बिहार मौर्य और गुप्त साम्राज्यों की भूमि रही है। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक ने यहीं से अपने साम्राज्य का विस्तार किया। सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद अहिंसा का मार्ग अपनाया और बौद्ध धर्म को पूरी दुनिया में फैलाया। गुप्त वंश के शासनकाल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है, जब कला, साहित्य, विज्ञान और दर्शन अपने चरम पर थे। वैशाली, जिसे दुनिया का पहला गणराज्य माना जाता है, भी बिहार में ही स्थित है।



6. बिहार: पाटलिपुत्र के नाम और विरासत का ऐतिहासिक महत्व

बिहार का नाम संस्कृत शब्द 'विहार' से निकला है, जिसका अर्थ है बौद्ध मठ या मठों का स्थान। पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) कभी मौर्य और गुप्त साम्राज्यों की राजधानी हुआ करता था और इसे भारत के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक शहरों में से एक माना जाता है।


1912 में बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग होकर बिहार एक स्वतंत्र राज्य बना और तब से यह निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। 22 मार्च को बिहार दिवस मनाना इस गौरवशाली इतिहास को याद करने का दिन है।

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