UPSC New Rules: IAS, IPS और IFS को बड़ा झटका, अब बार बार नहीं दे सकेंगे एग्जाम, जानिए नए कड़े नियम

UPSC New Rules: अगर कोई उम्मीदवार पहले की किसी परीक्षा के आधार पर IAS या IFS में नियुक्त होकर सेवा का सदस्य बन चुका है, तो वह सिविल सेवा परीक्षा 2026 में बैठने का पात्र नहीं होगा।

UPSC New Rules
यूपीएससी ने लगाया अटेम्प्ट लिमिट- फोटो : social media

UPSC New Rules: देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए एक झटका वाली खबर सामने आई है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की चयन प्रक्रिया और परीक्षा देने के प्रयासों (Attempts) को लेकर नियमों में कड़ा बदलाव किया है। अब IAS, IPS और IFS आप बार-बार सिविल सेवा परीक्षा में अपनी किस्मत नहीं आजमा सकेंगे। आखिर क्या है आयोग का नया फरमान और इसका आपकी तैयारी पर क्या असर पड़ेगा? आइए विस्तार से समझते हैं।

नए नियमों लागू 

जानकारी अनुसार यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन जारी करते हुए नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इस बार खास तौर पर पहले से चयनित अफसरों के दोबारा परीक्षा देने पर नई सीमाएं तय की गई हैं, ताकि बार-बार प्रयास करने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण रखा जा सके। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी बदलाव भी किए गए हैं।

दोबारा परीक्षा देने के नियमों में बड़े बदलाव

अगर कोई उम्मीदवार पहले की किसी परीक्षा के आधार पर IAS या IFS में नियुक्त होकर सेवा का सदस्य बन चुका है, तो वह सिविल सेवा परीक्षा 2026 में बैठने का पात्र नहीं होगा। अगर कोई उम्मीदवार प्रीलिम्स 2026 पास करने के बाद IAS/IPS में नियुक्त हो जाता है, तो वह मुख्य परीक्षा 2026 नहीं दे सकेगा। अगर मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद और परिणाम से पहले किसी की IAS/IFS में नियुक्ति हो जाती है, तो 2026 के परिणाम के आधार पर उसे दूसरी सेवा के लिए नहीं माना जाएगा।

IPS और ग्रुप-A सेवाओं से जुड़े नियम

जो उम्मीदवार पहले से IPS में चयनित या नियुक्त हैं, वे CSE 2026 के जरिए फिर से IPS नहीं पा सकेंगे। CSE 2026 में यदि किसी को IPS या ग्रुप-A सेवा मिलती है, तो उसे केवल एक बार (CSE 2027) में रैंक सुधारने का मौका मिलेगा। 2027 में परीक्षा देने के लिए ट्रेनिंग से संबंधित अधिकारी की अनुमति और फाउंडेशन कोर्स में जॉइन करने से एक-बार की छूट जरूरी होगी। 2028 या उसके बाद फिर से परीक्षा देने के लिए सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।

ट्रेनिंग और सर्विस से जुड़े नियम

अगर उम्मीदवार 2026 में मिली सेवा की ट्रेनिंग न ज्वाइन करे और छूट भी न ले, तो उसकी सेवा स्वतः रद्द हो जाएगी। 2027 के परिणाम के बाद वह 2026 या 2027 में मिली किसी एक सेवा को चुन सकता है। 2027 में चयन न होने पर वह 2026 में मिली सेवा ज्वाइन कर सकता है। वरिष्ठता उसी सेवा में ज्वाइन करने की तारीख के आधार पर तय होगी।

परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और अन्य बदलाव

फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य- 2026 से यूपीएससी की सभी परीक्षाओं में AI आधारित फेस ऑथेंटिकेशन होगा, जिससे फर्जी उम्मीदवारों और जालसाजी पर रोक लगेगी। दिव्यांग उम्मीदवारों को राहत- अब उन्हें अपनी पसंद का परीक्षा केंद्र दिया जाएगा। प्रीलिम्स के बाद आंसर-की- प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद उत्तर कुंजी जारी होगी और अभ्यर्थी उस पर आपत्ति दर्ज कर सकेंगे। अंतिम उत्तर-कुंजी रिजल्ट के बाद जारी होगी। कुल मिलाकर, 2026 से यूपीएससी ने सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने पर कड़े नियम लागू किए हैं, जबकि परीक्षा को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है।