साहिबगंज पेयजल योजना पर राज्य सरकार के रवैये से हाईकोर्ट नाराज, लगाई कड़ी फटकार

झारखंड के साहिबगंज जिले में 70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन पेयजल आपूर्ति योजना में अनियमितता को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.....

साहिबगंज पेयजल योजना पर राज्य सरकार के रवैये से हाईकोर्ट नार
साहिबगंज पेयजल योजना पर राज्य सरकार के रवैये से हाईकोर्ट नाराज- फोटो : न्यूज4नेशन

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने साहिबगंज की लगभग 70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन पेयजल आपूर्ति योजना को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन से संचालित इतनी महत्वपूर्ण योजना की वास्तविक स्थिति सामने आना बेहद जरूरी है। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही या अधिकारियों की अक्षमता के कारण जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता।


अपर मुख्य सचिव को खुद फील्ड पर जाने का आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अपर मुख्य सचिव को स्वयं साहिबगंज जाकर पूरी योजना का जमीनी निरीक्षण करने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह जिम्मेदारी किसी अन्य अधीनस्थ अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निरीक्षण के दौरान पेयजल विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ, साहिबगंज नगर परिषद की अध्यक्ष और याचिकाकर्ता सिद्धेश्वर मंडल के अधिकृत प्रतिनिधि को भी मौजूद रहने की अनुमति दी गई है।


सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा विरोधाभास

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश करते हुए दावा किया कि 10 मार्च 2026 के आदेश के बाद योजना का शेष कार्य पूरा कर लिया गया है और पाइपलाइन के सभी लीकेज ठीक कर दिए गए हैं। इसके विपरीत, याचिकाकर्ता सिद्धेश्वर मंडल ने जवाबी हलफनामा दायर कर सरकार के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जमीनी हकीकत दावों से बिल्कुल अलग है, योजना अभी भी अधूरी है और कई इलाकों में पानी का रिसाव बदस्तूर जारी है।


21 वार्ड पार्षदों ने खोली दावों की पोल

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब साहिबगंज नगर परिषद के 28 में से 21 वार्ड पार्षदों के बयान अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इन पार्षदों ने लिखित रूप से कोर्ट को बताया कि शहर के अनेक क्षेत्रों में अभी तक लोगों को घरेलू नल कनेक्शन तक नसीब नहीं हुए हैं और कई मुख्य स्थानों पर पाइपलाइन में लगातार लीकेज की समस्या बनी हुई है। पार्षदों के इस बयान ने सरकार की कार्यप्रणाली और दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


24 जुलाई तक रिपोर्ट तलब, 30 जुलाई को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावों को देखते हुए वास्तविक स्थिति के निष्पक्ष आकलन के लिए वरिष्ठ अधिकारी के स्तर पर निरीक्षण का फैसला लिया है। अदालत ने अपर मुख्य सचिव को 24 जुलाई तक हर हाल में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस बेहद महत्वाकांक्षी योजना के भविष्य और साहिबगंज की जनता को स्वच्छ पानी मिलने की उम्मीद अब 30 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।