पेरेंट्स बच्चों से कभी न बोले ये 7 झूठ, आपके लाड़ले का 'बिगड़' सकता है भविष्य..
बच्चों के मन पर पेरेंट्स की कही हर बात का गहरा असर पड़ता है। कुछ मामूली झूठ जो पेरेंट्स बच्चों को डराने या सुधारने के लिए बोलते हैं, उनके भविष्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

बच्चों का मन बेहद कोमल और मासूम होता है। इसलिए पेरेंट्स को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि वे बच्चों से क्या बोल रहे हैं। कई बार पेरेंट्स बच्चों को डराने या सुधारने के लिए कुछ झूठ बोल देते हैं, जो भले ही उन्हें तत्काल समाधान दे देते हों, लेकिन इनका बच्चों पर गहरा और नकारात्मक असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं उन झूठों के बारे में जिनसे पेरेंट्स को बचना चाहिए।
1. "मैं तुम्हें छोड़कर चला जाऊंगा/जाऊंगी"
बच्चों को डराने के लिए यह झूठ बोला जाता है, लेकिन यह उनकी मानसिकता पर बहुत बुरा असर डालता है। बच्चों को हमेशा यह विश्वास दिलाना चाहिए कि उनके माता-पिता हमेशा उनके साथ हैं। ऐसा झूठ बच्चों में असुरक्षा की भावना पैदा करता है और उनके भावनात्मक विकास को प्रभावित करता है।
2. "अगर झूठ बोलोगे, तो नाक लंबी हो जाएगी"
यह मजाकिया झूठ बच्चों को सच और झूठ के बीच फर्क करने में भ्रमित करता है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि झूठ बोलने से क्या असल परिणाम होते हैं। अगर इस तरह के झूठ बोले जाते हैं, तो बच्चे झूठ बोलने को खेल मान सकते हैं, जिससे वे जीवन में सही-गलत का फर्क नहीं समझ पाएंगे।
3. "अगर शैतानी की, तो डॉक्टर इंजेक्शन देगा"
बच्चों को डॉक्टर के नाम से डराना उनकी सेहत के प्रति नकारात्मक विचार पैदा कर सकता है। इसका असर यह हो सकता है कि भविष्य में बच्चे डॉक्टर से इलाज कराने से डरेंगे और उनकी सेहत को खतरा हो सकता है।
4. "मैं तुम्हारी शिकायत कर दूंगा"
यह झूठ बच्चों को बार-बार दूसरों के सामने शर्मिंदा करने की धमकी देता है, जिससे उनके आत्मसम्मान पर असर पड़ता है। इससे वे खुलकर अपनी बात रखने से डरने लगते हैं। बच्चों को उनकी गलतियों को सुधारने का मौका देना चाहिए, न कि उन्हें डराने का।
5. "मुझे सब पता है तुमने क्या किया"
इस तरह के झूठ बच्चों में अपराधबोध पैदा करते हैं। बच्चों को अपनी गलतियों को समझने और सुधारने का मौका देना चाहिए। उन्हें यह नहीं महसूस कराना चाहिए कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
6. "तुम ये काम नहीं कर सकते"
ऐसी बातें बच्चों के आत्मविश्वास को कमजोर करती हैं। पेरेंट्स को बच्चों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं और माता-पिता हमेशा उनके साथ हैं।
7. "तुम सबसे अच्छे हो"
हालांकि बच्चों की तारीफ करना जरूरी है, लेकिन ज्यादा तारीफ उन्हें झूठा आत्मविश्वास दे सकती है। बच्चों को उनकी वास्तविक क्षमताओं और कमजोरियों का सही आकलन करना सिखाना चाहिए, ताकि वे अपनी वास्तविकता से जुड़ी रहें।
निष्कर्ष
बच्चों के साथ हमेशा ईमानदारी और खुलेपन का व्यवहार रखना चाहिए। बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सेहत के लिए यह बेहद जरूरी है कि पेरेंट्स उनकी सोच और समझ को सही दिशा में विकसित करने के लिए उनका मार्गदर्शन करें। झूठ बोलने से बच्चों के आत्मविश्वास, मानसिक विकास और भावनात्मक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, पेरेंट्स को बच्चों से कभी भी इन झूठों से बचने का प्रयास करना चाहिए।
Disclaimer: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है और इसका उद्देश्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श करें।