औरंगाबाद में किसानों पर पड़ी दोहरी मार, सिर पर मंडरा रहा सुखाड़ का बादल, कालाबाजारियों ने बाज़ार से गायब किया खाद

औरंगाबाद में किसानों पर पड़ी दोहरी मार, सिर पर मंडरा रहा सुखाड़ का बादल, कालाबाजारियों ने बाज़ार से गायब किया खाद

AURANGABAD : औरंगाबाद के आसमान में सुखाड़ के काले बादल मंडरा रहे है। बारिश नही हो रही है। इसके बावजूद अन्नदाताओं ने पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान के बिचड़े तैयार कर लिए है। विलंब के बावजूद अब रोपनी की तैयारी है। इसके लिए उर्वरकों की जरूरत है। लेकिन कालाबाजारियों ने खाद को गधे के सिर से सिंग की भांति गायब कर दिया है। नतीजा किसानों में हाहाकार मचा है। ऐसे में रेट पर खाद पाने के लिए किसानों की नजर सहकारी संस्थाओं के उर्वरक बिक्री केंद्रों की ओर जाती है पर यहां भी खाद के लिए काफी मारामारी है। वहां किसानों की लंबी लाइन लगी है। आसमान आग उगल रहा है। 


किसान गमछे से पसीना पोछते खाद के लिए लाइन में लगे है। औरंगाबाद में बिस्कोमान के उर्वरक बिक्री केंद्र पर खाद लेने के लिए लाइन में लगे किसानों ने बताया कि प्राइवेट उर्वरक रिटेलर निर्धारित कीमत से ज्यादा रेट पर खाद दे रहे है। यही वजह है कि किसान खाद पाने के लिए सहकारी संस्थाओं के बिक्री केंद्र पर निर्भर है, पर यहां भी भीड़ ज्यादा है। अहले सुबह से ही किसान खाद लेने के लिए लंबी लाइन में लग रहे है। बारिश नही होने से उमसभरी गर्मी में घंटों लाइन में लगने पर खाद मिल रहा है, पर यहां भी आबंटन का अभाव है। इस कारण यहां से भी उन्हे पर्याप्त मात्रा में उर्वरक नही मिल रहा है। किसानों ने कहा कि सिर्फ आधार कार्ड पर खाद देना गलत है बल्कि कृषि भूमि की रसीद पर खाद दिया जाना चाहिए ताकि रसीद से खाद की आवश्यक मात्रा का पता चल सके। दोष सिस्टम का है क्योकि आधार कार्ड से गैर किसान भी खाद प्राप्त कर दूसरे किसानों को खाद दे दे रहे है। इस वजह से किसानों में खाद लेने की होड़ सी मची है। किसान प्राइवेट रिटेलर के यहां जाते है तो वह ज्यादा कीमत पर खाद देते है। 

इसकी शिकायत करने पर कृषि विभाग के अधिकारी कहते है कि ज्यादा कीमत पर खाद लेने की रसीद दीजिएं। जो ब्लैक में बेचेंगा, वह रसीद नही देगा। किसानों ने कहा की हम खाद ले कि शिकायत करने जाएं। खाद की कालाबाजारी में प्रशासन की मिलीभगत है। वही इस मामले में जिला कृषि पदाधिकारी का जवाब अटपटा सा है। वे ज्यादा रेट पर खाद लेने के मामले में कहते है कि किसान परेशान है। प्रकृति की मार झेल रहे है। उनके पास पूंजी का अभाव है। लिहाजा वे रिटेलर से उधारी में खाद मांगते है जबकि सहकारी संस्थाओं से नगद में खाद मिलता है। रिटेलर जब उधारी में खाद देगा तो अधिक कीमत लेगा ही। वही रिटेलर भी थोक विक्रेता से उधार में खाद लेते है। उधारी में उन्हे भी महंगा दर पर खाद मिलता है। इस कारण वे भी महंगे दर पर खाद बेच रहे है। इसके बावजूद जो भी किसान नगद में रिटेलर से खाद खरीद रहे है, वे पॉस मशीन में बताई जा रही कीमत से अधिक न दे और अधिक कीमत मांगे जाने पर इसकी शिकायत करे। 

मतलब साफ है कि उधारी का चादर ओढ़ाकर डीएओ रिटेलरों की कालाबाजारी को जायज भी ठहरा रहे है और उन्हे पाक साफ भी बता रहे है। इस बीच किसानों को हो रही परेशानी को लेकर विधानसभा चुनाव में रफीगंज से प्रत्याशी रहे सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता प्रमोद सिंह ने साथ दिया है। उन्होने डीएम से मिलकर किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी रोकने की मांग की है। उन्होने कहा है कि वे किसान के बेटे है और खुद भी खेती-किसानी करते है। यदि किसानों को पर्याप्त मात्रा में सही दर पर खाद नही मिला और कालाबाजारी नही रूकी तो वें किसानों को साथ लेकर बड़ा आंदोलन करेंगे और इसकी पूरी जिम्मेवारी जिला प्रशासन की होगी।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट 

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