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भू-अधिग्रहण का मुआवजा बांटने में सुस्ती बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, बैठक में मंत्री ने दे दिया आदेश

भू-अधिग्रहण का मुआवजा बांटने में सुस्ती बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, बैठक में मंत्री ने दे दिया आदेश

PATNA : रैयतों को मुआवजा भुगतान में विलंब को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग गंभीर है। विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने आज उन जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण पूछने का आदेश दिया जहां की परियोजना में मुआवजा का भुगतान 20 फीसदी से भी कम हुआ है और इस वजह से वहां परियोजना की प्रगति बाधित है। 



रैयतों को मुआवजा भुगतान में विलंब के मुद्दे को माननीय मंत्री आलोक कुमार मेहता ने भी गंभीरता से लिया है। माननीय मंत्री ने कहा कि वेबजह भुगतान में विलंब करने वाले अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 



 बैठक में सभी जिला भू अर्जन पदाधिकारियों को निदेष दिया गया कि दर को लेकर या किसी अन्य कारण से अगर रैयत मुआवजा लेने को अनिच्छुक है तो वहां रैयतों को निष्चित अंतराल पर 3 बार नोटिस दें। इसके बावजूद भी अगर लोग मुआवजे की राशि को लेने को लेकर अनिच्छुक हैं तो उस राशि को आर्बिट्रेटर/न्यायाधिकरण में जमा कर दिया जाए।  



बैठक में कई जिलों में जिला भू अर्जन पदाधिकारियों के पदस्थापित रहते भूमि सुधार उप समाहर्ता को काला बनाए जाने को मुद्दे को विभाग ने गंभीरता से लिया है। अपर मुख्य सचिव ने निदेशक भू अर्जन को निर्देश दिया कि इस संबंध में एनएच और एनएचएआई को पत्र लिखा जाए कि जिला भू अर्जन पदाधिकारियों को काला यानि भू अर्जन हेतु सक्षम प्राधिकार बनाया जाए। जिस जिले में जिला भू अर्जन पदाधिकारी पदस्थापित नहीं हैं वहीं डीसीएलआर को सक्षम प्राधिकार बनाया जाए।  



 आज की बैठक में वंषावली के मुद्दे पर अस्पष्टता की वजह से मुआवजा भुगतान में विलंब का मसला भी उठा। इस संबंध में पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध करने का निर्णय लिया गया कि जबतक इस संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता है तबतक पुराने तरीके से वंशावली निर्माण की व्यवस्था ही चलने दिया जाए। पूर्व में सरपंचों द्वारा वंषावली बनाया जाता था किन्तु कुछ माह पूर्व पंचायती राज विभाग ने इसे बंद करने का आदेश दिया था।   



आज की बैठक में अपर मुख्य सचिव ने सभी जिला भू अर्जन पदाधिकारियों को कहा कि वो भू अर्जन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों की स्कैनिंग कराकर उन्हें सुरक्षित कर लें। जिन दस्तावेजों की स्कैनिंग की जा रही है उनमें अधियाचना, अधिसूचना, अधिघोषणा, पंचाट, दखल-कब्जा सौंपने और मुआवजा भुगतान से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। फिलहाल विभाग द्वारा सभी जिलों के राजस्व संबंधी दस्तावेजों की स्कैनिंग का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। 



 बैठक में एनएचएआई/एनएच के अधिकारियों द्वारा विभिन्न जिलों में चल रहे आर्बिट्रेषन और कोर्ट केस की संख्या के संबंध में सूचना देने का विभाग से अनुरोध किया गया। अपर मुख्य सचवि ने विभाग के आईटी मैनेजर से संबंधित जानकारी देने के लिए साफ्टवेयर बनाने का निदेष दिया। इस साफ्टवेयर से यह भी पता चलेगा कि आयुक्त और लारा कोर्ट में किस दिन, कितने मामले सूचीबद्ध है।



इस दौरान एनएच की 27 परियोजनाओं की समीक्षा की गई। वैशाली में बन रहे जन्दाहा बाईपास को लेकर जिला भू अर्जन पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि कम दर से नाराज लोग मुआवजा भुगतान नहीं ले रहे हैं। इस वजह से कुल स्वीकृत 53 करोड़ में से मात्र 19 करोड़ की राशि का ही वितरण हो पाया है। जबकि कटिहार बाईपास के निर्माण में आर्मी कैन्टोनमेंट द्वारा 2 मौजों से एलाइनमेंट के सटे होने पर ऐतराज जताने के बाद काम रोक दिया गया है। अपर मुख्य सचिव द्वारा 2 मौजों के अतिरिक्त मौजों में भुगतान करने का आदेश दिया गया।



बांका जिले में नवघोषित राष्ट्रीय राजमार्ग 133-ई की समीक्षा के दौरान पता चला कि जिले में 28 मौजों का 3A तो 1.9.23 को हो चुका है लेकिन 3D अभी तक नहीं भेजा गया है। इसे काम में लापरवाही मानते हुए अपर मुख्य सचिव ने बांका के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के खिलाफ प्रपत्र क गठित करने का आदेश विभागीय अधिकारियों को दिया। 



आज की बैठक में एनएचएआई से संबंधित 65 से अधिक परियोजनाओं की समीक्षा की गई। सभी मामलों में परियोजनों में हो रहे विलंब को जानने की कोशिश की गई और बाधा को दूर करने के उपायों पर चर्चा हुई। सभी मामलों में मुआवजा भुगतान में तेजी लाकर अधियाची विभाग को जमीन का दखल कब्जा जल्द से जल्द सौंपने का निर्देश दिया गया।



आज की बैठक में रेलवे, मेट्रो, एसएसबी समेत राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई और सभी में मुआवजा भुगतान में तेजी लाकर परियोजना को समय से पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। 



बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह, निदेशक भू-अर्जन सुशील कुमार, सहायक निदेशक आजीव वत्सराज समेत सभी जिलों के भू-अर्जन पदाधिकारी और सभी अधियाची विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित थे।






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