बांस के पंडाल के बाद अब बिहार में पहली बार बांस से बनाई जा रही है दुर्गा प्रतिमा

बांस के पंडाल के बाद अब बिहार में पहली बार बांस से बनाई जा रही है दुर्गा प्रतिमा

KATIHAR : दुर्गा पूजा के मामले में बिहार के कटिहार को मिनी कोलकाता कहा जाता है, इसके अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां सिर्फ शहर में ही लगभग 50 से अधिक दुर्गा पूजा का आयोजन होता है और इस बार पिछले 2 सालों से कोरोना के कहर के कारण पूजा के आयोजन में कुछ पाबंदियों के कारण जो भव्यता में कमी थी इस बार सभी पाबंदी दूर होने के बाद  आयोजन में वह भव्यता अभी से ही नजर आ रहा है, इसी बीच बात अगर बिहार में थीम बेस दुर्गा पूजा की आयोजन का करें तो कटिहार के 'सन् ऑफ इंडिया क्लब' शायद पूरे बिहार में ऐसे आयोजन के मामले में सबसे पुराना आयोजक के रूप में अपना पहचान दर्ज करवा सकता है, बंगाली बहुल इस मोहल्ले में इस बार भी न सिर्फ बांस के कारीगरी का भव्य पंडाल बन रहा है बल्कि मां दुर्गा की प्रतिमा भी बांस का ही बना हुआ दिखेगा। 

क्लब के अध्यक्ष बासी दत्ता ने बताया कि सॉन् ऑफ इंडिया क्लब कटिहार में उन संस्थाओं में शामिल है, जो कई सालों के दुर्गा पूजा का आयोजन करता रहा है। शहर में थीम वाली पूजा का कांसेप्ट इसी क्लब से शुरू हुआ था। लेकिन पिछले दो साल से कोरोना के कारण दुर्गापूजा प्रभावित हो रही थी। इस साल जब फिर से पूजा को लेकर स्थिति सामान्य हो गई तो हम लोगों ने योजना बनाई कि इस बार पूजा को ज्यादा भव्य और आकर्षक बनाया जाए। ऐसे में यह योजना बनी कि पूरे पंडाल को न सिर्फ बांस से तैयार कराया जाए, बल्कि सारी प्रतिमाओं का निर्माण भी बांस से ही किया जाए।

बासी दत्ता ने बताया कि बिहार में अब तक मिट्टी, थर्मोकोल और दूसरी चीजों से प्रतिमा का निर्माण किया जाता रहा है। लेकिन बांस की प्रतिमा का निर्माण कभी नहीं किया गया है। पूरी प्रतिमा को बनाने में सिर्फ बांस का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए बंगाल से कारीगरों को बुलाया गया है।


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