गरीब सर्वणों पर आरक्षण को सही बताने को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद BJP ने RJD से पूछा - अब किस मुंह से सवर्णों से वोट मांगने जाओगे

गरीब सर्वणों पर आरक्षण को सही बताने को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद BJP ने RJD से पूछा - अब किस मुंह से सवर्णों से वोट मांगने जाओगे

PATNA : गरीब सवर्णों को मिले 10 फीसदी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब बिहार की राजनीति फिर गर्मा गई है। दो सीटों पर हुए उपचुनाव में एक सीट पर राजद समर्थित महागठबंधन को परास्त करने के बाद बीजेपी अब EWS सवर्णों को दिए गए आरक्षण का विरोध जताने वाले राजद के खिलाफ हमलावर हो गई है। बीजेपी सांसद सुशील मोदी (BJP MP Sushil Modi) ने कहा कि 2019 में जब मोदी सरकार ने यह आरक्षण दिया था तो राजद ने सबसे पहले इसका विरोध किया था। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने भी यह मान लिया है कि केंद्र सरकार का फैसला बिल्कुल सही है। ऐसे में राजद को बताना चाहिए कि वह किस मुंह से अब सवर्णों से वोट मांगने के लिए जाएंगे।

सुशील मोदी ने कहा कि जब यह आरक्षण दिया गया तो राजद, डीएमके सहित कुछ पार्टियां ने संसद के दोनों  सदनों ने खुलकर विरोध किया था। केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने तो सदन का बहिष्कार तक कर दिया था। अब जब कोर्ट ने फैसला दे दिया है तो इन पार्टियों की गरीब सवर्णों के प्रति क्या सोच है, यह जाहिर हो गया है। सुशील मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐतिहासिक है, लेकिन राजद और आम आदमी पार्टी के लोगों को सोचना होगा कि अब किस मुंह से सवर्णों का वोट मांगने के लिए जाएंगे।

ट्विटर पर किया पोस्ट

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सुशील मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि RJD ने EWS के 10 % आरक्षण के विरोध में संसद के दोनों सदनों में मतदान किया था।Rjd अब किस मुँह से सवर्णो से वोट माँगने जाएगी ।

 बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण के प्रावधान को बरकरार रखा है. 5 जजों की बेंच में से चार जजों ने संविधान के 103 वें संशोधन अधिनियम 2019 को सही माना है. सुप्रीम कोर्ट में इसे मोदी सरकार की बड़ी जीत मानी जा रही है.दरअसल, केंद्र सरकार ने संविधान में संशोधन कर सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया था. आरक्षण का प्रावधान करने वाले 103वें संविधान संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. 5 जजों की बेंच में तीन जजों ने EWS आरक्षण के समर्थन में फैसला सुनाया. जबकि जस्टिस एस. रविंद्र भट्ट और सीजेआई यूयू ललित ने EWS आरक्षण पर अपनी असहमति जताई.

 जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने EWS आरक्षण के फैसले को सही ठहराया. जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने अपनी राय सुनाते हुए कहा कि सवाल बड़ा ये था कि क्या EWS आरक्षण संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. क्या इससे SC /ST/ ObC को बाहर रखना मूल भावना के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि EWS कोटा संविधान का उल्लंघन नही करता। EWS आरक्षण सही है. ये संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता. ये भारत के संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है. जस्टिस बेला त्रिवेदी ने कहा, मैंने जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की राय पर सहमति जताई है

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