पटना में कृषि विवि और बामेती ने अंतर्राष्ट्रीय सिम्पोसियम का किया आयोजन, कृषि में तकनीक के बदलाव पर होगी चर्चा

पटना में कृषि विवि और बामेती ने अंतर्राष्ट्रीय सिम्पोसियम का किया आयोजन, कृषि में तकनीक के बदलाव पर होगी चर्चा

PATNA : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, बामेती पटना और आइएसइए के संयुक्त तत्वावधान में कृषि अभियंत्रण के 55 वें वार्षिक समारोह के दौरान तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सिम्पोसियम का आयोजन किया जा रहा है। यह सिम्पोसियम 23 से लेकर 25 नवंबर तक चलेगा। सिम्पोसियम के बारे में बताते हुये डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाले समय में खेती की तकनीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले समय की चुनौतियों को देखते हुए कृषि अभियंत्रण में किस तरह के बदलाव की आवश्यकता है, उसी को लेकर सिम्पोसियम में चर्चा की जायेगी। इसमें देश विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञ  अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे और कृषि अभियंत्रण में उभरते हुये चुनौतियों के बारे में चर्चा करेंगे। डा. श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद शिरकत कर रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन अभियंत्रण महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा.अम्बरीष कुमार की ओर से किया जा रहा है। 

कार्यक्रम में बोलते हुये उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय कृषि के क्षेत्र में काफी अच्छा काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सुखेत मॉडल की चर्चा भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने मन की बात कार्यक्रम में की है। उन्होंने कहा कि इसके लिये विश्वविद्यालय के कुलपति डा. रमेश चन्द्र श्रीवास्तव प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार कृषि के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है और कृषि रोडमैप बनाकर खेती के विकास को लेकर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि रोड मैप में बारह विभाग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। 


कार्यक्रम को बिहार के कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कृषि अभियंत्रण ही तय करेगा कि आने वाले समय में खेती किस ओर जायेगी। उन्होंने कहा कि कृषि को आधुनिक बनाने में कृषि अभियंताओं की अहम भूमिका है जिसके लिये उनकी सराहना की जानी चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि पूसा विश्वविद्यालय राज्य के कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। पूसा विश्वविद्यालय ने कृषि अवशेष को उपयोगी बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। वहां अरहर के डंठल से टेबल, फेंकी हुई सब्जियों से हर्बल गुलाल, के अतिरिक्त मत्सय बंधु, बोट बेस्ड सोलर पंप आदि का आविष्कार किया है जो सराहनीय है। कार्यक्रम को बिहार सरकार के कृषि सचिव एम श्रवनन कुमार ने भी संबोधित किया। उन्होंने बिहार सरकार की ओर से खेती से विकास को लेकर किये जा रहे कार्यों की विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट योगदान के लिये कृषि अभियंताओं को विभिन्न गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। टेक्सास विश्वविद्यालय के डॉ. विजय पाल सिंह, कोट विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनोज खन्ना एवं डॉ. के एन तिवारी को उनके विशिष्ट योगदान के लिये सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कृषि अभियंत्रण से जुड़े पुस्तक एवं सोवेनियर का विमोचन भी किया गया। 

यह कार्यक्रम तीन दिनों तक चलेगा जिसमें देश के तेइस  राज्यों के वैज्ञानिक शिरकत कर रहे है़ इसके अतिरिक्त अमेरिका सहित लगभग दस देशों से अधिक के वैज्ञानिक भी अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया जा रहा है जिसमें उपस्थित प्रतिभागियों के अतिरिक्त आन लाइन मोड में भी प्रतिभागी सम्मिलित होंगे। कार्यक्रम के आयोजन में डॉ अम्बरीष कुमार, डॉ. सोमनाथ राय चौधरी, डॉ एम एन झा, डॉ एस के पटेल, डॉ राकेश मणि शर्मा, डॉ कुमार राज्यवर्धन के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अन्य वैज्ञानिकों का अहम भूमिका रही है।

पटना से वंदना शर्मा की रिपोर्ट 

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