बिना किसी कोचिंग के बीपीएससी में 10वां रैंक हासिल करने में कामयाब हुए अंकित, अभी सिक्योरिटी कंपनी के लिए करते हैं काम

बिना किसी कोचिंग के बीपीएससी में 10वां रैंक हासिल करने में कामयाब हुए अंकित, अभी सिक्योरिटी कंपनी के लिए करते हैं काम

64वें बीपीएससी के लिए भी हुआ था चयन, लेकिन रैंकिंग से नहीं थे संतुष्ट

बचपन से मेधावी रहे हैं, पटना सेंट्रल स्कूल से की है 12वीं की पढ़ाई

NAUGACHHIYA :- नवगछिया के साहू परबत्ता निवासी दिलीप कुमार साह और शिक्षिका श्रीमती अंजू कुमारी के पुत्र अंकित कुमार ने बीपीएससी 65 वीं परीक्षा में दसवां स्थान लाकर जिले का नाम रौशन किया है> परिणाम आते ही अंकित के पैतृक गांव में हर्ष का माहौल है तो अंकित के बचपन के दोस्त उसकी सफलता से काफी उत्साहित हैं. मालूम हो कि अंकित एक सुरक्षा कंपनी में बतौर इंजीनियर उड़ीसा में वर्ष 2013 से पदस्थापित है. 

अंकित ने बताया कि उसकी प्रारंभिक शिक्षा कटिहार के कुर्सेला में रह कर पूरा किया. कुर्सेला में अंकित के बड़े पापा विनय कुमार साहू और बड़ी मां निवर्तमान जिला परिषद अध्यक्ष क्रांति देवी रहते हैं. इसके बाद की पढ़ाई पटना स्थित रामकृष्ण रेजिडेंशियल स्कूल से पूरी की और पटना सेंट्रल स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की. अंकित ने बताया कि इसके बाद उन्होंने भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक किया और वर्ष 2013 में एक सुरक्षा कंपनी में बतौर इंजीनियर अपनी सेवा देने लगा. इस दौरान वह बीपीएससी की तैयारी भी करता था. वर्ष 2018 में भी उसने बीपीएससी की परीक्षा पास की जिसके बाद वह श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बनाए गए. 64 वीं बीपीएससी परीक्षा में भी उसने सफलता हासिल की और रेवेन्यू ऑफिसर का पद उसे मिला.

 अंकित ने बताया कि वह यहीं पर नहीं रुके और 65 वीं बीपीएससी की परीक्षा में भी शामिल हुए और उसने दसवां स्थान प्राप्त किया है. अंकित की मां श्रीमती अंजू देवी को गोनरचक मध्य विद्यालय में शिक्षिका है. अंकित ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता को दिया है. अंकित की सफलता पर उसके तीन बहनों पूजा आरती और रितिका काफी खुश हैं. परिजनों ने बताया कि बचपन से ही अंकित काफी मेधावी था और उन लोगों को उम्मीद थी कि अंकित एक दिन कुछ ऐसा करेगा जिससे उसके समाज और परिवार का नाम काफी ऊंचा होगा. 

स्वाध्याय और कड़ी मेहनत से मिली सफलता

अंकित ने कहा कि उसने यह सफलता अपने कड़ी मेहनत के बल पर हासिल किया है. उसने किसी भी कोचिंग क्लास का सहारा नहीं लिया लेकिन इंटरव्यू गाइडेंस उसने पटना के रंजीत कुमार सिंह के मिशन 50 से जरूर लिया. अंकित ने कहा कि सिलेबस और प्रीवियस ईयर का क्वेश्चन बैंक का गहन अध्ययन और खुद का नोट्स तैयार कर उसने यह सफलता पाई है. अंकित ने कहा कि जो कि वह 8 घंटे ड्यूटी करता था और उसके बाद पढ़ाई करता था इसलिए उसने कई वर्षों तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं किया. अंकित ने कहा कि गांव से गांव के लोगों से मम्मी, पापा, सगे - संबंधियों और बहनों से उनका काफी लगाव है. फुर्सत के दिनों में वह इन्हीं लोगों के साथ समय बिताना पसंद करता है.

कामयाबी पर गांव के लोगों में खुशी

 इधर अंकित की सफलता पर गांव के लोगों में काफी खुशी है, सावित्री पब्लिक स्कूल के निदेशक शिक्षाविद रामकुमार साहू, बाल भारती के प्रशासक डीपी सिंह, प्राचार्य नवनीत सिंह, तेजस्वी पब्लिक स्कूल के प्राचार्य सीपीएन चौधरी, बाबा गणिनाथ सेवा समिति के अध्यक्ष पंकज कुमार भारती, क्लीन नवगछिया ग्रीन नवगछिया के अध्यक्ष चंद्रगुप्त साह, मीडिया प्रभारी अशोक केडिया, पारसनाथ साहू समेत बड़ी संख्या में लोगों ने अंकित की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए बधाई दी है.

अंजनी कुमार कश्यप की रिपोर्ट



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