असामाजिक तत्वों ने की तालीबानी हरकत : तोड़ डाली उमगा पहाड़ पर स्थापित प्राचीन पुरातात्विक पालकालीन गौरी-शंकर की मूर्ति, लोगों में गुस्सा

असामाजिक तत्वों ने की तालीबानी हरकत : तोड़ डाली उमगा पहाड़ पर स्थापित प्राचीन पुरातात्विक पालकालीन गौरी-शंकर की मूर्ति, लोगों में गुस्सा

AURANGABAD : ऐसा लगता है कि अफगानिस्तान में जिस तरह तालिबान ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा रहा है, उसका असर भारत में भी हुआ है। कम से कम बिहार के औरंगाबाद जिले में हुए इस घटना के बाद यह कहना गलत नहीं होगा। यहां असमाजिक तत्वों ने मदनपुर की उमगा पहाड़ी पर स्थापित अत्यंत  प्राचीन पुरातात्विक पालकालीन गौरी-शंकर की मूर्ति और अति प्राचीन शिवलिंग को असमाजिक तत्वों ने तोड़ कर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। अति प्राचीन मूर्तियों को खंडित किये जाने से लोगों का गुस्सा उबाल पर है। लोग मूर्तियों को खंडित करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर कार्रवाई करने की लगातार मांग कर रहे है। 

विश्व धरोहर में शामिल करने की हो रही थी मांग

गौरतलब है कि उमगा पहाड़ी पर 52 मंदिरों का समूह है और समूह के हर मंदिर में देवी-देवताओं की एक से बढ़कर एक दुर्लभ और अति प्राचीन मूर्तियां स्थापित है। इस स्थल की महता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उमगा पहाड़ी पर स्थित 52 मंदिरों के समूह को यूनेस्को के विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने की चर्चा जोर पकड़ चुकी थी।  इन्ही मंदिरों के समूह में एक अति प्राचीन सूर्य मंदिर भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में तीन मंदिरों-देव, देवकुंड और उमगा का निर्माण किया था। इतना ही नही गौरीशंकर खोह को छोड़कर इस समूह के अन्य मंदिरों तक पहुंचना इस कारण सरल है कि इन मंदिरों तक जाने के लिउए पहाड़ों को काट कर सीढ़ीयां बनी हुई है। वही गौरीशंकर खोह जाने का पहाड़ी रास्ता बेहद संकीर्ण, चुनौतीपूर्ण और कंकरीला-पथरीला है। 

दुनिया में इकलौती है गौरी शंकर की ऐसी मूर्ति

इस कारण साहसी श्रद्धालु ही दुर्गम रास्ते से होकर गौरीशंकर की दुर्लभ मूर्ति के दर्शन करने जाया करते हैं। गौरीशंकर की मूर्ति के दुर्लभ होने का कारण यह है कि यहां स्थापित गौरी यानी देवी पार्वती और शंकर यानी भगवान शंकर की मूर्ति युगल रुप में होने के साथ ही मैथुनी मुद्रा में है और इस मूर्ति में भगवान शंकर का हाथ गौरी पार्वती के वक्षस्थल पर है, जो सृजन का परिचायक है तथा यह दुनिया की इकलौती मूर्ति है, जिसे असामाजिक तत्वों ने खंडित कर दिया है। 

हालांकि इस मामले में औरंगाबाद के पुलिस कत्तान कांतेश कुमार मिश्रा का दावा है कि पुलिस मूर्तियों को खंडित करनेवाले असामाजिक तत्वों की शिनाख्त में लगी है और शीघ्र ही वें पुलिस के गिरफ्त में होंगे।



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