पति हाथ पैर से दिव्यांग, खुद भी अपंग, फिर भी कई घरों में फैलाई रोशनी, खुद के साथ कई महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

पति हाथ पैर से दिव्यांग, खुद भी अपंग, फिर भी कई घरों में फैलाई रोशनी, खुद के साथ कई महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

GAYA.  जिले के इमामगंज प्रखंड अंतर्गत झरहा गांव में रहने वाली दिव्यांग लीलावती देवी एलईडी बल्ब बनाने में दक्षता हासिल करने के बाद अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है। इतना ही नहीं गांव में समूह की कई और महिलाओं को इस काम से जोड़ कर उनको भी एलईडी बल्ब बनाना सीखा दी। 

इस संबंध में लीलावती देवी ने बताया कि मेरा शादी 2018 में हुआ था।  जो उनका पति भी हाथ एवं पैर से विकलांग और कुछ काम धंधा भी नहीं कर पाते हैं। उन्होंने बताया कि शादी के बाद सास - ससुर के सहयोग से कुछ दिन अपने पति के साथ घर चलाएं। लेकिन कुछ दिनों के बाद उनके साथ ससुर ने अपने से कमा कर खाने के लिए लगातार ताना माना करते थे। इसी बीच लीलावती देवी गांव की जीविका दीदियों के सहयोग से जीविका समूह में जुड़कर वाह एलईडी बल्ब बनाना सीखी है। वहां पर वे समूह में ही अन्य महिलाओं के साथ बल्ब बनाकर प्रतिदिन औसतन 20 एलईडी बल्ब तैयार करती थी। इसके बदले में उसे एक एलईडी बल्ब बनाने पर 17 रुपए मिलता था। इसके बाद उन्होंने एक - एक रुपए इकट्ठा के करीब 20 हजार रुपए जमा करने के बाद एक गोमटी में दुकान की स्थापना किया। जहां वह प्रतिदिन 8 से 10 एलईडी बल्ब बना लेती है। इस एलईडी बल्ब बाजार में मूल्य 250 रुपये में बिकता है। लागत और बिक्री के मध्य 50 रुपये के मुनाफे में 20 रुपये प्रति पीस बल्ब बनाने वाली महिला के हिस्से में जाता है। इस प्रकार समूह की अन्य महिला भी एलईडी बल्ब बनाकर औसतन कर रही है। जिससे नारी सशक्तीकरण के ये दो उदाहरण बताने के लिए काफी हैं कि कैसे मुफलिसी के अंधेरे में फंसे परिवारों को समृद्धि से रोशन कर दिया। 

बैसाखी के सहारे हर दिन पांच किमी साइकिल चलाकर पहुंचती है दुकान

वहीं लीलावती देवी ने बताया कि वह अपने ससुराल झरहा गांव से पांच किलोमीटर दूर परसीया गांव के लिए बैसाखी साइकिल से प्रतिदिन पहुंच कर दुकान खोलती है फिर वह इस एलईडी बल्ब बनाने की कार्र में लग जाती है। वही लीलावती देवी की इस कार्र को देखकर गांव की अन्य महिला काफी प्रसन्न होती है। वहीं गांव की महिलाओं ने बताया कि लीलावती एलईडी बल्ब बनाकर अपने परिवार का जो भरण पोषण कर रही है यह काबिले तारीफ है इससे अन्य महिलाओं के भी प्रेरणा लेने की जरूरत है। जो आज वह गृहस्थी की गाड़ी खींचने में कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग दे रही हैं।

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