सिंचाई विभाग में बड़े घोटाले का खुलासा! अरुण कुमार बोले- एस्टीमेट घोटाला कर लूटी जा रही बिहार में राशि

सिंचाई विभाग में बड़े घोटाले का खुलासा! अरुण कुमार बोले- एस्टीमेट घोटाला कर लूटी जा रही बिहार में राशि

PATNA: बिहार नव निर्माण मोर्चा के संयोजक पूर्व सांसद अरुण कुमार ने नीतीश सरकार पर घोटाला करने का आरोप लगाया है। पटना में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अरुण कुमार ने बिहार के सिंचाई विभाग में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने का दावा किया है। उन्होंने घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। संवाददाता सम्मेलन में अरुण कुमार के साथ पूर्व मंत्री रेणु कुशवाहा और अनिल कुमार भी उपस्थित थे।

ललन सिंह पर आरोप

अरुण कुमार ने दावा किया कि तत्कालीन जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सिंचाई विभाग में अरबों रुपये का घोटाला किया है। उन्होंने बागमती नदी के दक्षिणी तटबंध के उन्नयीकरण एवं मजबूतीकरण कार्य में 300 करोड़ रुपये के बंदरबाट का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि इस घोटाले से संबंधित सबूत उनके पास हैं।

बिहार में एस्टीमेट घोटाला का दावा

बिहार नव निर्माण मोर्चा के नेताओं ने बताया कि बागमती नदी के दक्षिणी तटबंध के 90 किलोमीटर में उन्नयीकरण एवं मजबूतीकरण का कार्य करने का एकरारनामा एसबीडी के माध्यम से हैदराबाद की एक कंपनी BSCPL Infrastracture Pvt. Ltd के साथ किया गया जिसकी राशि 580 करोड़ रुपये की थी। एकरारनामा के शर्तों के मुताबिक यह कार्य उस कंपनी का स्वयं करना था लेकिन इस कंपनी ने दिल्ली की कंपनी M/S FrontLIne Innovation Pvt Ltd को सबलेट कर दिया। इस कंपनी ने भी स्वंय काम न कराकर पुन: इसके 80 फीसदी से अधिक कार्यों को छोटे कंपनियों को सौंप दी।

उन्होंने दावा किया कि BSCPL ने जिस दर पर सरकार से कार्य प्राप्त किया, उसके आधे दर से भी कम राशि पर M/S FrontLIne Innovation Pvt Ltd द्वारा कार्य को आगे 10-11 ठीकेदारों को सबलेट किया गया। इस प्रकार M/S FrontLIne Innovation Pvt Ltd ने सरकार द्वारा निर्धारित दर से आधे दर कार्य कराकर करीब 200 करोड़ रुपये से उपर की बचत की। उन्होंने कहा कि दुगनी राशि का इस्टीमेट बनाकर 200 करोड़ रुपये से अधिक राशि के गबन में हिस्सेदारी की गई।

अरुण कुमार ने बताया कि इस्टीमेट में लगभग 3 करोड़ क्यूबिक मीटर मिट्टी का कार्य दिखाया गया है, जबकि वास्तव में मात्र 2 करोड़ क्यूबिक मीटर के मिट्टी कार्य ही किया गया है।  BSCPL Infrastracture Pvt. Ltd को 3 करोड़ क्यूबिक मीटर के मिट्टी कार्य का भुगतान किया गया। इस दौरान लगभग 150 करोड़ रुपये का बंदरबाट किया गया।

सीबीआई जांच की मांग

अरुण कुमार ने आरोप लगाया कि तत्कालीन जल संसाधन मंत्री ललन सिंह के सहमति से इस घोटाले को अंजाम दिया गया है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी व्यक्तियों की संपत्ति को जब्त किया जाना चाहिए।



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