चिराग को बड़ा झटका: बंगला चुनाव चिन्ह पर रोक, 5 अक्टूबर को दोनों गुट चुनाव आयोग में रखें अपना पक्ष

चिराग को बड़ा झटका: बंगला चुनाव चिन्ह पर रोक, 5 अक्टूबर को दोनों गुट चुनाव आयोग में रखें अपना पक्ष

NEW DELHI: बिहार में अक्टूबर में विधानसभा के उपचुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर लोजपा भी इसमें उम्मीदवारों उतारने का फैसला कर रही थी। हालांकि इसके पहले भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे लोजपा को काफी असर पड़ने वाला है। आपको बता दें केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने लोजपा के चुनाव चिन्ह यानी की ‘बंगले’ पर रोक लगा दी है। इस रोक के बाद चिराग पासवान और पशुपति पारस, दोनों में से कोई भी गुट इस उपचुनाव में बंगला चिन्ह पर दावेदारी नहीं कर सकेगा।

केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने ‘बंगला’, यानी कि लोजपा के आधिकारिक चुनाव चिन्ह को फ्रीज करते हुए दोनों ही गुटों को इसपर दावेदारी करने से रोक लगा दी है। लोजपा के दोनों गुट, यानी कि चिराग पासवान का गुट और पशुपति पारस का गुट, दोनों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह दिया जाएगा। इस चुनाव चिन्ह के सहारे दोनों ही गुट आगामी बिहार विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार उतार सकते हैं। इसके साथ ही भारत निर्वाचन आयोग ने लोजपा नाम के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है। हालांकि आयोग ने कहा है कि दोनों गुट लोजपा से जुड़े नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं, यदि बेहद जरूरी है तो। 

इसके साथ ही भारत निर्वाचन आयोग ने पशुपति पारस और चिराग, दोनों गुटों को 4 अक्टूबर, दोपहर 1 बजे तक कुछ बातें तय करने का वक्त दिया है। इसके तहत दोनों गुट अपने-अपने दल के नए नाम तय कर लेंगे, जिससे वह आगे बिहार विधानसभा उपचुनाव में पहचाना जाएंगे। इसके अलावा बाय-इलेक्शन के लिए चुनाव आयोग द्वारा तय की गई सिंबल लिस्ट से अपने लिए कोई भी सिंबल चुनने का विकल्प भी दिया गया है।



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