बड़ा खुलासाः नीतीश सरकार के आदेश के बाद भी नहीं हटे अररिया के प्रभारी DTO, मुख्य सचिव के ऑर्डर को दिखाया जा रहा ठेंगा

बड़ा खुलासाः नीतीश सरकार के आदेश के बाद भी नहीं हटे अररिया के प्रभारी DTO, मुख्य सचिव के ऑर्डर को दिखाया जा रहा ठेंगा

PATNA:  नीतीश सरकार के आदेश को अफसर ही ठेंगा दिखा रहे हैं। सरकार के सबसे बड़े अफसर मुख्य सचिव ने 19 अप्रैल को आदेश जारी किया था कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अतिरिक्त प्रभार में नहीं रहेंगे। अगर ऐसा है तो इनसे तत्काल प्रभार वापस लें। एक महीना से अधिक का समय बीत गया, इसके बाद भी सरकार के मुख्य सचिव के आदेश का तामिला नहीं हुआ है। जिलों के डीएम ने जब मुख्य सचिव के आदेश के बाद भी लोक शिकायत निवारण पदाधिकारियों से प्रभार वापस नहीं लिया,तब 19 मई को सचिवालय से ही 14 लोक शिकायत निवारण पदाधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद भी खेल  खत्म नहीं हुआ है। सामान्य प्रशासन विभाग भले ही कुछ अफसरों को प्रभार से मुक्त किया हो लेकिन आज भी ऐसे अफसर हैं जिन्हें मलाईदार जगह मिली हुई है। वे लोग चुपचाप काम कर रहे हैं। बिहार के एक जिले के डीटीओ ऐसे हीं है। लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी होते हुए वे जिला परिवहन पदाधिकारी के पद पर बने हुए हैं। मुख्य सचिव के आदेश का असर अब तक नहीं हुआ है। 

मुख्य सचिव ने 19 मई को जारी किया था आदेश 

सीएम नीतीश के आदेश पर मुख्य सचिव ने 19 अप्रैल 2022 को आदेश जारी किया था. सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर यह निदेशित किया था कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारियों से स्थानीय स्तर पर अन्य कार्यों का प्रभार नहीं दिए जाएं. यदि किसी लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को अन्य प्रभार दिया गया है तो उन्हें अविलंब मुक्त करें. सामान्य प्रशासन विभाग ने स्वीकार किया है कि डीएम ने अतिरिक्त भार से मुक्त नहीं किया. सामान्य प्रशासन विभाग ने भले ही 14 लोक शिकायत निवारण पदाधिकारियों को मुक्त कर दिया हो लेकिन अररिया के फारबिसगंज अनुमंडल के लोक जन शिकायत पदाधिकारी विपिन कुमार यादव आज भी जिला परिवहन पदाधिकारी के अतिरिक्त प्रभार में हैं। आज तक इनको अतिरिक्त प्रभार से मुक्त नहीं किया गया है।

खास अफसर पर मेहरबानी क्यों

बता दें, फारबिसगंज के लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विपिन कुमार यादव 18 फरवरी 2019 से वहां पदस्थापित हैं। डीएम की अनुशंसा पर परिवहन विभाग ने विपिन कुमार यादव को काफी पहले डीटीओ का प्रभार दिया था जो आज तक है। आज भी परिवहन विभाग के वेबसाइट पर अररिया के डीटीओ विपिन यादव ही हैं। स्पष्ट है कि परिवहन विभाग पर मुख्य सचिव के आदेश का असर नहीं। समझा जा सकता है कि बिहार में किस तरह की प्रशासनिक अराजकता है। जब सरकार के सबसे बड़े अफसर के आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता हो वहां छोटे अफसरों के आदेश का क्या वैल्यू। तभी तो इस सुशासनी राज में आम लोग त्रस्त हैं और इनकी सुनने वाला कोई नहीं। 


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