बिहार के एक MVI के सामने मंत्री से लेकर सचिव तक का सरेंडर ! ....जवाब देने में परिवहन सचिव को छूटने लगे पसीने और बगले झांकने लगे मंत्री जी

बिहार के एक MVI के सामने मंत्री से लेकर सचिव तक का सरेंडर ! ....जवाब देने में परिवहन सचिव को छूटने लगे पसीने और बगले झांकने लगे मंत्री जी

PATNA:परिवहन विभाग के मुजफ्फरपुर जिले के मोटरयान निरीक्षक यानि एमवीआई दिव्य प्रकाश के आगे पूरे सिस्टम ने सरेंडर कर दिया है।यूं कहें कि एक इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी[MVI} के आगे परिवहन मंत्री से लेकर सचिव तक पूरी तरह से किंकर्तव्यविमुढ़  हो गए हैं।यह बात उस समय साबित हो गई जब मुजफ्फऱपुर में फर्जीवाडा किए एमवीआई दिव्य प्रकाश पर कार्रवाई से संबंधित सवाल पर परिवहन सचिव और मंत्री को सांप सुंध गई।सचिव संजय अग्रवाल को कोई जवाब नहीं सुझ रहा था वहीं मंत्री जी भी टुकुर-टुकुर देख रहे थे।

न्यूज4नेशन के सवाल से परिवहन सचिव संजय अग्रवाल इस तरह से आहत हो गए कि उन्हें कोई जवाब नहीं सुझ रहा था।उनसे जब पूछा गया कि आपने हीं तो 8 महीने पहले कहा था कि आरोपी एमवीआई के खिलाफ जांच कराई जा रही है और जांच के बाद एमवीआई पर कार्रवाई होगी। आखिर आठ महीने बाद विभाग कहां तक पहुंचा। क्या विभाग ने कार्रवाई नहीं कर एक भ्रष्ट अधिकारी को बचाने की कोशिश तो नहीं की है? सवाल से हक्के-बक्के परिवहन सचिव संजय अग्रवाल ने कहा कि विभाग कई अधिकारियों पर कार्रवाई किया है।अब एक मुजफ्फरपुर एमवीआई का मामला है उसमें कार्रवाई होगी।पीसी में हीं वे अधिकारियों को निर्देश देने लगे।

परिवहन सचिव को जवाब नहीं सुझ रहा तो मंत्री संतोष निराला भी चुपचाप यह स्थिति देख रहे थे।वे भी पूरे मामले से अवगत थे।मंत्री ने भी आरोपी एमवीआई के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।लेकिन करीब एक साल बाद भी ताकतवर एमवीआई के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।


न्यूज4नेशन ने किया था खुलासा 

न्यूज4नेशन ने कुछ समय पहले खुलासा किया था कि किस तरह मुजफ्फरपुर के मोटरयान निरीक्षक (MVI) दिव्य प्रकाश ने  सारे नियमों की अनदेखी कर पुलिस द्वारा जब्त कर थाने में रखे ट्रकों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया। बता दें कि दिव्य प्रकाश ने ऐसे ट्रकों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया था जिसे मोतिहारी जिले के रक्सौल और दूसरी गाड़ी को हरसिद्धि थाने ने जब्त कर रखा था। MVI साहब दिव्य प्रकाश ने गाड़ी संख्या BR06G 2467 का फिटनेस सर्टिफिकेट पुलिस द्वारा जब्त किए जाने के बाद जारी किया। रक्सौल पुलिस ने जिस ट्रक को 1 अगस्त 2018 को जब्त किया, मुजफ्फरपुर MVI ने उसके दो दिन बाद यानी 3 अगस्त 2018 को उसी ट्रक का फिटनेस दे दिया। वही दूसरे ट्रक जो हरसिद्धि थाने ने जब्त कर रखा था उस गाड़ी को भी एमवीआई नें मुजफ्फरपुर में बैठे-बैठे फिटनेस का सर्टिफिकेट दे दिया।

    

खबर चलने के बाद शुरू हुई थी जांच

यह खबर दिखाए जाने के बाद परिवहन विभाग के प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गयी थी। एक एमवीआई के चलते पूरे विभाग की किरकिरी हो रही थी, लिहाजा आरोपी अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश भी दिए गए।तिरहुत कमिश्नर के साथ-साथ सचिवालय स्थित परिवहन विभाग के दफ्तर में भी जांच की फाइल बढने लगी। लेकिन इतने समय बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।विभाग के जानकार सूत्र बतातें हैं कि इस फर्जीवाड़ा के खुलासे के बाद जांच की फाइल दौड़ी।लेकिन कुछ दिन के बाद किसी अदृश्य दबाव के बाद फाइल को डंप करा दिया गया।चर्चा है कि एमवीआई के फर्जीवाड़े वाली फाइल को डंप कराने में लक्ष्मी नारायण की कृपा थी।दरअसल विभाग के अधिकारियों की लक्ष्मी नारायण में आस्था कुछ ऐसी है कि सरकारी कायदे  कानून को ताक पर रखनें में देर नहीं लगती। 

क्या था पूरा मामला

दरअसल ये मामला मुजफ्फरपुर के मोटरयान निरीक्षक (MVI) दिव्य प्रकाश से जुड़ा है। MVI  ने सारे नियमों की अनदेखी कर एक ऐसे ट्रक का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जिसे मोतिहारी जिले के रक्सौल थाने ने 1 अगस्त 2018 से ही जब्त कर रखा है। MVI साहब दिव्य प्रकाश ने गाड़ी संख्या BR06G 2467 का फिटनेस सर्टिफिकेट पुलिस द्वारा जब्त किए जाने के बाद जारी किया। रक्सौल पुलिस ने जिस ट्रक को 1 अगस्त 2018 को जब्त किया, मुजफ्फरपुर MVI ने उसके दो दिन बाद यानी 3 अगस्त 2018 को उसी ट्रक का फिटनेस दे दिया।

दरअसल मोतिहारी के रक्सौल थाना क्षेत्र में उस ट्रक ने 1 अगस्त 2018 की शाम एक व्यक्ति को रौंद दिया था, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गयी थी। घटना के बाद रक्सौल पुलिस ने उस ट्रक को जब्त कर लिया था। लेकिन अपनी रिपोर्ट में MVI  ने लिखा है कि मैंने मुजफ्फरपुर में 3 अगस्त को ही उस गाड़ी की जांच की है और जांच में गाड़ी फिट पायी गयी। इसलिए उस वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। 


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