गर्मी के मिजाज से किसान परेशान, 30 डिग्री से अधिक रहा पारा तो गेहूं उत्पादन में इतने प्रतिशत तक की गिरावट,कैसे?

गर्मी के मिजाज से किसान परेशान, 30 डिग्री से अधिक रहा पारा तो गेहूं उत्पादन में इतने प्रतिशत तक की गिरावट,कैसे?

patna.  फरवरी महीने में गर्मी का का रंग देख किसान परेशान हो उठा है ।पारा लगातार चढ़ते जा रहा है और सूरज का मिजाज भी धीरे-धीरे बदल रहा है। यही वजह है कि गर्मी में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। फरवरी के महीने में जहां अधिकतम तापमान 20 डिग्री से नीचे रहना चाहिए जो बढ़कर 30 डिग्री तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि गर्मी का मिजाज अगर यही रहा तो किसानों को गेहूं उत्पादन में 25% तक का नुकसान पहुंच सकता है।

मौसम अनुकूल खेती का रास्ता ही सबसे अच्छा

गर्मी के बदलते मिजाज यानी यूं कहें कि मौसम के हर महीने में बदलते रंग ने यह बता दिया है कि मौसम अनुकूल खेती योजना को अपनाकर किसान सुखी रह सकते हैं ।मौसम अनुकूल खेती योजना के तहत राज्य में जहां भी खेती हुई है वहां गेहूं की फसल अच्छी है और अब वह पकने भी लगी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं जाड़े की फसल है और नई वैरायटी तापमान सेंसिटिव होती है। लिहाजा जिस किसान ने समय से फसल लगाया होगा उसे नुकसान कम होगा लेकिन लेकिन कई किसानों ने परंपरागत कृषि के तहत दिसंबर तक इसकी बुआई की है इस स्थिति में उनकी फसलों के लिए यह गर्मी हानिकारक है। उत्पादन 25% तक गिर सकता है ।बताया जा रहा है कि अगर फरवरी महीने में व मार्च के 10 दिनों तक और ठंड रह जाती है तो किसान गेहूं की अच्छी फसल निकाल ले जाते।

22 लाख हेक्टेयर में होती है गेहूं की खेती व 40 लाख टन होता है उत्पादन

पूरे बिहार में 22 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की जाती है। इससे 40 लाख टन गेहूं का उत्पादन होता है ।गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए तापमान के संबंध में वैज्ञानिकों का मानना है कि 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे होना चाहिए न्यूनतम तापमान। वहीं 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे होना चाहिए अधिकतम तापमान। जबकि अभी अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस है । इस स्थिति में किसानों को 25% है तक का फसल उत्पादन में नुकसान हो सकता है हालांकि जहां फल लग गया है वहां नुकसान थोड़ा कम होगा।

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