BIHAR NEWS: सरकारी योजना का लगा दिया पलीता, 91 स्कूलों में साइकिल योजना के करोड़ों रुपए का हिसाब नहीं

BIHAR NEWS: सरकारी योजना का लगा दिया पलीता, 91 स्कूलों में साइकिल योजना के करोड़ों रुपए का हिसाब नहीं

छपरा: सारण जिले में सरकारी राशि का बंदरबांट किया जाना कोई नई बात नहीं है। अभी पोशाक, छात्रवृत्ति, परिभ्रमण योजनाओं के मामले सलटे भी नहीं थे, कि 91 स्कूलों द्वारा साइकिल योजना के करोड़ों रुपए का हिसाब नहीं देने का मामला सामने आ गया है। ये मामले 2016 से लेकर 2018 तक के बीच के हैं। डीईओ अजय कुमार सिंह के आदेश पर डीपीओ योजना एवं लेखा ने अब इन हाई स्कूलों के हेड मास्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इन हेड मास्टरों का वेतन बंद कर दिया गया है और अब एफआइआर की तैयारी की जा रही है। डीपीओ शकुंतला कुमारी का कहना है कि आखिर में किस वजह से चार सालों से करोड़ों रुपए के हिसाब पर कुंडली मारकर हेड मास्टर बैठे हुए हैं। 

डीपीओ ने अपने जारी पत्र में कहा है कि अभी तक 10 बार से अधिक रिमाइंडर दिया जा चुका है लेकिन साइकिल योजना के तहत खर्च किए गए रुपए का अभी तक हिसाब नहीं दिया गया है। फिलहाल सभी 91 हेड मास्टरों का वेतन बंद किया जाता है और यदि चार दिनों के अंदर हिसाब नहीं देते हैं और उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। क्योंकि ये सरकारी रुपये हैं और इसका हिसाब देना लाजमी है। हिसाब यदि नहीं दिया जाता है कोई और गबन के दायरे में आता है साथ ही सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने का भी मामला बन जाता है।

सारण में स्कूली योजनाओं में किस तरह का गबन का खेल होता है यह किसी से छिपा नहीं है। कभी फर्जी नाम पर तो कभी फर्जी कागज पर खर्च दिखाकर सरकारी राशि का गबन कर लिया जाता है। 2003 से लेकर 2013 तक खेल खूब चला। कई बार तो साइकिल वितरण करने के लिए शिक्षा विभाग के कार्यालय के ही कर्मी संलिप्त पाए गए थे । कई घरों के कमरों में सैकड़ों की संख्या में साइकिल रखे हुए पाए गए थे और वहीं से स्कूलों की सप्लाई हो रही थी। इसके अलावा बच्चों के फर्जी नाम पर भी साइकिल के रुपए का उठाव कर लिया जाता था। छात्रवृत्ति और पोशाक के रुपए भी फर्जी नाम पर उठा लिए जाते थे। आज भी यदि उन मामलों की जांच हो तो करोड़ों रुपए के गबन के मामले सामने आएंगे। 

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