BIHAR NEWS: जदयू का ऑपरेशन कांग्रेस शुरू ! अब तीर के निशाने पर हाथ, जदयू के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में कई कांग्रेसी विधायक

BIHAR NEWS: जदयू का ऑपरेशन कांग्रेस शुरू ! अब तीर के निशाने पर हाथ, जदयू के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में कई कांग्रेसी विधायक

DESK: सूबे में सियासत के पल पल बदलते रंग के बीच ही राजनीति के गलियारे में एक और खबर तैर रही है और वह खबर है कांग्रेस के कई विधायकों का जदयू के संपर्क में रहना। दरअसल सूबे में यह बात काफी वक्त से तैर रही थी कि कांग्रेस के कई विधायक जदयू के संपर्क में हैं और ये सभी आने वाले दिनों में हाथ का साथ छोडकर जदयू का दामन थाम सकते हैं।  जानकारों का यहां तक मानना है कि जदयू के इस ऑपरेशन को एनडीए की ताकत बढाने के लिए किया जा रहा है।

चुनाव परिणाम आने के साथ ही होने लगी थी चर्चा

दरअसल गुजरे साल बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद ही यह चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि कांग्रेस विधायक दल में बड़ी टूट हो सकती है। तब यह कहा गया था कि पार्टी के 11 विधायकों का एक धड़ा टूटकर जदयू में जाने के लिए तैयार है। तब यह चर्चा भी जोरों पर थी कि जदयू में कांग्रेस से टूटकर जो विधायक जाने वाले हैं, वे सब जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह तथा सूबे की सरकार में मंत्री अशोक चौधरी के नजदीकियों में से हैं। बता दें कि बिहार विधान सभा में कांग्रेस के 19 विधायक हैं। कांग्रेस के इन विधायकों को तोड़ने के लिए दो तिहाई विधायकों को तोड़ना जरूरी होगा यानी कि कम से कम 13 विधायक कांग्रेस से टूटेंगे तो पूरी पार्टी विधानसभा में टूट जाएगी। टूट के बाद सभी विधायक किसी एक दल में शामिल होकर अपना समर्थन दे सकते हैं। अब इस बात की चर्चा जोरों पर हैं कि एनडीए के कुछ बड़े नेता इसी मिशन में लगे हैं। सूत्रों की माने तो इस मिशन में रूकावट सूबे में कोरोना संक्रमण को देखते हुए रोक दिया गया था। कांग्रेस पार्टी के विधायक रहे भरत सिंह ने कुछ माह पहले ही यह कह दिया था कि कांग्रेस के करीब 11 ऐसे विधायक हैं तो चुनाव तो जीत चुके हैं लेकिन उनको पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। इन विधायकों की ही जदयू में जाने की संभावना है। 

मिशन कंपलीट हुआ तो घटक दलों की बारगेनिंग पावर होगी खत्म

दरअसल कांग्रेस पार्टी को तोड़ने को लेकर बिहार एनडीए की एक सोची समझी रणनीति मानी जा रही है। जानकारों की माने तो एनडीए सूबे में अपनी सरकार स्थिर रखने के लिए ऑपरेशन कांग्रेस को कर सकती है। ऐसा इसलिए कि सूबे में सरकार में शामिल हम पार्टी व वीआइपी पार्टी के सियासी कदमों पर एनडीए की पैनी नजर बनी रहती है। इन दोनों दलों के नेता अपने बयानों या अपने उठाये गये कदमों से आये दिन सूबे की सरकार की पेशानी पर बल ड़ालते रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पूर्व सीएम जीतनराम मांझी और वीआइपी पार्टी के मुकेश साहनी के पूर्व के राजनैतिक कदमों पर राज्य सरकार चाह कर भी पूरी तरह से यकीन नहीं कर पा रही है। ये दोनों की पार्टियां अपने वक्त वक्त पर बारगेन करने का मूड बनाये रहती हैं। ऑपरेशन कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य पेशानी पर बल ड़ालने वाली पार्टियों की बारगेनिंग पावर को कुंद करने की है। 

अंग क्षेत्र के अहम विधायक कर सकते हैं लीड

राजनीति के बिसात पर अपनी पैनी नजर जमाने वाले जानकारों की माने तो इस बार जदयू के ऑपरेशन कांग्रेस की जिम्मेदारी अंग क्षेत्र के एक विधायक के नेतृत्व में की जा सकती है। जो वक्त वक्त पर अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं। ये कई बार विधायक भी रह चुके हैं और कांग्रेस के वरीय नेताओं में इनकी गिनती होती है। जानकारों के अनुसार अभी एनडीए के पास 128 विधायकों का समर्थन है और राजद यदि बहुत उठापटक कर भी ले तो भी वह बहुमत के आंकड़े के पास नहीं पहुंच सकता है। इससे पहले बंधन का जो घटक दल कांग्रेस है वह टूट जाएगा। यानि बिहार में घटक दलों के बारगेनिंग पावर को घटाने के लिए एनडीए और विशेष रूप से जदयू इस मिशन में लगी हुई है।






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