BIHAR NEWS: कांग्रेस नेता-कार्यकर्ताओं का शांतिपूर्ण प्रदर्शन, SC के कथन के आलोक में राजद्रोह कानून समाप्त करने की रखी मांग

BIHAR NEWS: कांग्रेस नेता-कार्यकर्ताओं का शांतिपूर्ण प्रदर्शन, SC के कथन के आलोक में राजद्रोह कानून समाप्त करने की रखी मांग

GAYA: सोमवार को कांग्रेस पार्टी के तत्वाधान में गया के गेवालबीघा मोड़ स्थित खालिस पार्क में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजद्रोह कानून के भारी दुरूपयोग पर चिंता जाहिर की। साथ ही इसे अविलंब समाप्त करने की जरूरत की सराहना करते हुए कांग्रेस नेता सहित कार्यकर्ताओं ने सरकार से आईपीसी की धारा 124A को खत्म करने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कोविड गाइडलाइन का पालन करना सुनिश्चित किया गया।

प्रदर्शन में शामिल अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य सह क्षेत्रीय प्रवक्ता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी प्रो विजय कुमार मिठू, पूर्व विधायक मो. खान अली, कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ हामिद हुसैन, पूर्व पार्षद सह कांग्रेस नगर निकाय संयोजक शशि किशोर शिशु, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष युगल किशोर सिंह, बाबूलाल प्रसाद सिंह,अशोक सिंह, राम प्रमोद सिंह, जिला कांग्रेस महासचिव विद्या शर्मा, मो नवाब अली, सकलदेव चंद्रवंशी, मो अजहरुद्दीन, सुनील रविदास, राजू रजक, विजय कुमार सिन्हा, टिंकू गिरी, शिव कुमार चौरसिया, श्रवण पासवान, सुरेन्द्र मांझी, आदि ने कहा कि भाजपा सरकार अपने सात वर्षो के कार्यकाल में हजारों लोगों पर अंग्रेजी हुकूमत के समय के बनाए गए राजद्रोह कानून का जमकर दुरुपयोग कर मुकदमा दर्ज करने का काम किया। उनमें से केवल 1.76% लोग ही दोषी पाए गए। जिनका डाटा सार्वजनिक होने पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आजादी के 75 साल बाद भी इस कानून को जारी रखने पर सवाल उठाते हुए इसे अविलंब समाप्त करने की जरूरत बताई है।

नेताओं ने कहा कि अंग्रेजों ने जिस कानून को गांधी, तिलक, भगत सिंह, आदि को चुप कराने के लिए लाए थे, अब उसकी क्या जरूरत है। विश्व के कई लोकतांत्रिक देश जैसे ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया आदि ने अपने, अपने देशों में राजद्रोह कानून को समाप्त कर दिया है। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जो देश को आजादी के लिए हजारों कुर्बानियां देते हुए अंग्रेजी हुकूमत के दांत खट्टे किए तथा उनके लाख चाहने पर भी गांधी, नेहरू, सुभाष, भगत सिंह आदि के जुबान बंद नहीं हुए थे। आज आवश्यकता है, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए सम्पूर्ण देशवासियों के सहयोग से राजद्रोह कानून के दुरुपयोग को समाप्त करने की।

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