फर्जी कॉल पर पहली बार मीडिया के सामने आए बिहार के डीजीपी, साफ-साफ कह दिया पहले से कोई अंदाजा न लगाएं, सीबीआई जांच पर दी यह प्रतिक्रिया

फर्जी कॉल पर पहली बार मीडिया के सामने आए बिहार के डीजीपी, साफ-साफ कह दिया पहले से कोई अंदाजा न लगाएं, सीबीआई जांच पर दी यह प्रतिक्रिया

PATNA : बीते दिनों एक आईपीएस को बचाने के लिए हाईकोर्ट के फर्जी चीफ जस्टिस बनक कॉल किए जाने के मामले में पहली बार बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने मीडिया से बात की। बिहार केसरी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे बिहार के डीजीपी से विवादित फोन कॉल को लेकर जब मीडिया से बात की तो इस विषय पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। 

उन्होंने कहा कि ये बहुत ही गंभीर मामला है. इसका अनुसंधान चल रहा है. सबको ये सुझाव दूंगा कि अंदाजे पर बात बिल्कुल ना करें. इसका अनुसंधान चलने दीजिए. इसमें कुछ चीजें और भी हैं जिसपर बात की जाएगी. बिल्कुल सही समय पर मैं आपको एक-एक चीज के बारे में ब्रिफ करूंगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि इसमें कई नई जानकारी भी सामने आई है। जिसकी जांच की जा रही है

भाजपा की मांग को किया खारिज

इस पूरे मामले की जांच पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित एसआईटी द्वारा गठित एसआईटी द्वार की जारही है। जिसके बाद भाजपा ने पूरे जांच पर संदेह जताते हुए सीबीआई से कराने की मांग की है। लेकिन डीजीपी से इसपर बात किया गया कि क्या इस मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए, क्योंकि बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने यह बात उठायी है. 

जिसका जवाब देते हुए एसके सिंघल ने कहा कि इसपर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है. हमारी जो एजेंसी है वह पूरी तरह से सक्षम है. उनके अंदर पूरी दक्षता है. हमें किसी राजनीतिक बात में पड़ना ही नहीं है. हमलोग अफसर हैं. ये बहुत संवेदनशील, पेंचीदा, रेयर टाइप का मामला है. जिसका अनुसंधान अभी चल रहा है.

DGP पर दबाव बनाने के लिए रची साजिश : फर्जी फोन कॉल मामले के बाद बिहार के गृह विभाग ने आदित्य कुमार को उसके दोस्त अभिषेक अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद निलंबित कर दिया है. गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार के खिलाफ दर्ज शराब उल्लंघन मामले में क्लीन चिट दिलाने के लिए डीजीपी पर दबाव बनाने के लिए दोनों ने गहरी साजिश रची थी

चीफ-जस्टिस बना DGP को कराए फोन : पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल के रूप में अभिषेक अग्रवाल ने बिहार के डीजीपी को मुख्य न्यायाधीश के डीपी वाले फोन नंबर से 30 से अधिक कॉल किए थे. बिहार के डीजीपी ने अपनी रिपोर्ट में आदित्य कुमार के खिलाफ उस मामले में गलत तथ्य की ओर इशारा किया था. नतीजतन, वह पुलिस मुख्यालय पटना में एआईजी में शामिल हो गए.CM नीतीश के निर्देश पर दर्ज हुआ था FIR: 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार गया के एसएसपी थे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर उन पर आईपीसी की धारा 353, 387, 419, 420, 467, 468, 120बी, 66सी और 66 के तहत फतेहपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था. उनके अलावा फतेहपुर के एसएचओ संजय कुमार को भी सह आरोपी बनाया गया है.

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