आपदा प्रबंधन वर्ल्ड कांग्रेस में बिहार के इंजीनियर ने लहराया परचम, डॉ चौधरी 6 शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले विश्व के पहले अभियंता बने

आपदा प्रबंधन वर्ल्ड कांग्रेस में बिहार के इंजीनियर ने लहराया परचम, डॉ चौधरी 6 शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले विश्व के पहले अभियंता बने

PATNA : आपदारोधी एवं पर्यावरण के अनुकूल समाज निर्माण को कृतसंकल्पित तथा विज्ञान एवं तकनीक के विभिन्न पहलुओं को समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाने को कटिबद्ध पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता, बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के महासचिव  एवं इण्डियन इन्जीनियर्स फेडरेशन (पूर्व) के उपाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने आई आई टी दिल्ली में आयोजित आपदा प्रबंधन पर पांचवे वर्ल्ड कांग्रेस में शोध पत्र प्रस्तुत कर बिहार का परचम लहराया है। डॉ. चौधरी बिहार,भारत एवं विश्व के पहले ऐसे अभियंता है, जिन्होंने किसी वर्ल्ड कांग्रेस में आपदा प्रबंधन के विभिन्न विषयों पर छः शोध पत्र प्रस्तुत किये है। उनके छः  शोध पत्र का विषय था- -1.डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड सेंडइ फ्रेमवर्क:व्हाट डज इट मीन फॉर बिहार डिजास्टर रेसिलिएंस प्रैक्टिशनर 2.एन इनोवेटिव अप्रोच टू कॉस्ट इफेक्टिव डिजाईन ऑफ़ अर्थक्वेक रेसिस्टेंट ब्रिज एंड रोड्स  3.डिजास्टर मैनेजमेंट इन इंडिया :ए सिस्टेमेटिक एप्रोच  4.क्लाइमेट चेन्ज  डिस्प्लेसमेंट एंड क्लाइमेट डिजास्टर लॉ :चेलेन्जेज एंड ओपोरचुनिटीज 5. हीट वेव एंड आउटब्रेक ऑफ़ इन्सेफ्लितिज :ए केस स्टडी ऑफ़ बिहार 6.द लेसन ऑफ़ कोविद-19फॉर पब्लिक हेल्थ क्लाइमेट प्रिपेयर्डनेस। 

यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र संघ के बाहर आपदा प्रबंधन पर आयोजित होनेवाला दुनिया का सबसे बड़ा कांग्रेस है। डॉ. चौधरी ने अर्थक्वेक रेसिस्टेन्ट ब्रीज डिजाइन एवं अर्थक्वेक रेजिलिएन्ट सड़क के निर्माण एवं प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुतीकरण की शुरुआत करते हुए उन्होने विश्व के विभिन्न भागों में भूकंप के कारण ब्रीज फेल्योर के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होने अर्थक्वेक प्रूफ, अर्थक्वेक रेसिस्टेन्ट एवं अर्थक्वेक रेजिलिएन्ट स्ट्रक्चर के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि अर्थक्वेक रेसिस्टेन्ट ब्रीज डिजाइन एवं अर्थक्वेक रेजिलिएन्ट सड़क निर्माण एवं प्रबंधन न केवल सस्ता है बल्कि ड्यूरेबल एवं पर्यावरण के अनुकूल भी है। उन्होने पुल निर्माण में स्मार्ट मैटिरियल के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होने अर्थक्वेक से क्षतिग्रस्त पुलों के एडवान्स कम्पोजिट मैटिरियल से रेट्रो फिटिन्ग तकनीक पर भी प्रकाश डाला। उन्होने जूट जियोटेक्सटाइल के साथ भेटिभर ग्रास का उपयोग कर कटाव निरोधी कार्य एवं स्लोप प्रोटेक्शन करने के सस्ता एवं पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर बड़े ही सहज-सरल एवं रोचक ढंग से प्रकाश डाला। डॉ चौधरी ने बताया कि जूट का  प्रयोग कर न केवल सड़क के भार वहन छमता को बढाया जा सकता है बल्कि सड़क के क्रस्ट की मुटाई को भी कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा की सडक निर्माण मे प्लास्टिक का उपयोग कर न केवल अर्थक्वेक रेजिलिएन्ट एवं सस्ता सड़क निर्माण किया जा सकता है बल्कि पर्यावरण के हो रहे नुकसान को भी कम किया जा सकता है। उन्होने बताया कि अगर डिजास्टर रेजिलिएन्ट सडक का निर्माण एवं प्रबंधन करना है तो जुट एवं प्लास्टिक के प्रयोग चो बढ़ावा देना होगा । डा चौधरी ने बताया कि जूट एवं प्लास्टिक के प्रयोग  से न केवल डिजास्टर रेजिलिएन्ट सड़क का निर्माण होगा बल्कि संरचना की लाइफ भी  दुगुनी हो जाएगी। डॉ चौधरी ने भूकम्प जैसी  प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए इन्टिग्रेटेड एप्रोच अपनाने की जरूरत बताई। इसके लिए समाज में लोगो को जागरूक करना होगा। डॉ. चौधरी ने पुल एवं सड़क निर्माण कार्य में अभिकल्प एवं मटेरियल के विशिष्टयो एवं प्रबंधन नीतियों में बदलाव की जरूरत की जोरदार वकालत की एवं इस दिशा में शोध को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। 

उन्होंने डिजास्टर रेजिलिएन्ट निर्माण एवं प्रबंधन में  बायो इन्जिनियरिन्ग की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ऐसे पौधों को लगाने की जरूरत है जो कार्बन डाईऑक्साइड का शोषण कर सके। उन्होंने बताया कि  भूकम्परोधी पुल एवं भूकंप रेजिलिएन्ट सड़क निर्माण एवं प्रबंधन  पर समाज के हर तबके को जागरूक करने के अभियान को एक आन्दोलन का रूप देकर  पूरा देश में फैलाने की जरूरत है। डॉ चौधरी ने बताया कि बिहार समाज के विभिन्न स्टेकहोल्डर को इतने बड़े पैमाने पर आपदा प्रबंधन पर प्रशिक्षण देने वाला देश का पहला राज्य है। कहा कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना सुरक्षित बिहार विकसित बिहार को साकार करने के लिए चलाया जा रहा यह समाज को सुरक्षित करने का अभियान एक आन्दोलन है जिसे कालखंड हमेशा याद रखेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में आपदाओं का न्यूनीकरण करने पर काम चल रहा है और इसके लिए बिहार में पूरे देश मे सबसे पहले 2015 से 2030 तक का रोड मैप बनाया गया है। डॉ चौधरी ने एक सेशन की अध्यक्षता कर आपदा प्रबंधन के वर्ल्ड कांग्रेस में सेशन की अध्यक्षता करने वाले पथ निर्माण विभाग के पहले अभियंता  बन गए है। इस कांग्रेस में पचास देश के दो हज़ार डेलिगेट भाग  ले रहे है एवं करीब पांच सौ से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जायेंगे। डॉ चौधरी अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी एवं सामाजिक संगठनों से जुड़कर भूकंप एवं उससे निपटने के लिए  डिजास्टर रेजिलिएन्ट  एवं कौस्ट इफेक्टिव टेक्नोलॉजी को समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाने का काम करते रहे है। डॉ चौधरी ने अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय जर्नल एवं कान्फ्रेस में 208 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं एवं उन्हें 28 अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा जा चुका है ।

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