बिहटा एयरपोर्ट को चाहिए 191 एकड़ जमीनः सर्फुद्दीनपुर गांव बना उड़ान में बाधक..जमीन अधिग्रहण में सरकार रही विफल, अब कोर्ट जाने की तैयारी

बिहटा एयरपोर्ट को चाहिए 191 एकड़ जमीनः सर्फुद्दीनपुर गांव बना उड़ान में बाधक..जमीन अधिग्रहण में सरकार रही विफल, अब कोर्ट जाने की तैयारी

PATNA: बिहटा हवाईअड्डा से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का सपना पूरा होने में एक गांव रोड़ा बना हुआ है। इंटरनेशनल उड़ानों के लिए रनवे की लंबाई 12 हजार फीट होनी चाहिए। अभी बिहटा एयरपोर्ट पर 8200 फीट का रनवे प्रस्तावित है। यह घरेलू उड़ानों के लिए पर्याप्त है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एयरबस 120 और बोईंग 737 जैसे बड़े विमानों से विदेशी उड़ान के लिए राज्य सरकार से 191 एकड़ जमीन मांगी है। लेकिन इसमें एक गांव बाधक बन रहा। बिहटा एयरपोर्ट के पास ही अल्पसंख्यक बहुल सर्फुद्दीनपुर गांव है। इस गांव में करीब 150 घरों की आबादी है। गांव में मस्जिद और कब्रिस्तान भी है। इस गांव में सरकार एयरपोर्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं कर पा रही है। लिहाजा इंटरनेशल उड़ानों के लिए पर्याप्त जमीन नहीं मिल पा रही। राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने बजट सत्र में राज्यसभा में यह सवाल उठाया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा था कि रनवे बढ़ाने के लिए 191 एकड़ जमीन की मांग की गई है।

सर्फुद्दीनपुर गांव की जमीन अधिग्रहण नहीं कर पा रही सरकार

बिहटा एयरपोर्ट को 191 एकड़ जमीन देने में सरकार के सामने सर्फुद्दीनपुर गांव सबसे बड़ी बाधा बनी है।पूरे गांव को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर ही इतनी जमीन मिल पाएगी।प्रशासन अब तक यह काम करने में विफल साबित हुआ है। अगर सरकार इस गांव की जमीन का अधिग्रहण नहीं कर पाती है तो यहां से पटना एयरपोर्ट की तरह छोटे विमान ही उड़ पाएंगे।

बिहार से 191 एकड़ मांगी गई जमीन 

10 मार्च 2021 को राज्यसभा में सुशील मोदी के सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने भी रनवे बढ़ाने के लिए 191 एकड़ जमीन की मांग की। नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया था कि बिहटा में सिविल एन्क्लेव निर्माण हेतु हवाई अडडे की मौजूदा रनवे की लम्बाई को अन्तरराष्ट्रीय स्तर का करने के लिए 8,200 फीट से बढ़ा कर 12,000 फीट करने की जरूरत है, ताकि यहां B.777 और B.787 जैसे बड़े आकार के विमान व अन्तरराष्ट्रीय परिचालन के साथ-साथ कार्गो की वृद्धि हो सके। बिहटा में अभी जो रनवे की लम्बाई है, उससे ए-320 और ए-321 टाइप के छोटे विमानों का परिचालन ही संभव है। मंत्री ने कहा था कि पटना हवाई अड्डा का रनवे छोटा होने के कारण ही भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के संयुक्त उपयोग हेतु बिहटा में 937 करोड़ की लागत से बड़े आकार के विमानों के परिचालन के लिए सिविल एन्क्लेव का निर्माण प्रस्तावित है। बिहटा हवाई अड्डे के विकास व विस्तार के लिए बिहार सरकार ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को अब तक 108 एकड़ भूमि मुफ्त में दी है। अन्तरराष्ट्रीय स्तर के रनवे का विस्तार ताकि बड़े आकार के विमानों का परिचालन संभव हो सके, के लिए बिहार सरकार से 191.5 एकड़ जमीन की मांग की गई है ताकि रनवे की लम्बाई को बढ़ाकर 12,000 फीट किया जा सके। 

सरकार की क्या है मजबूरी? कोर्ट में ले जायेंगे मामला-डॉ. अशोक

 मालूम हो, पटना एयरपोर्ट का लोड घटाने के लिए 5 साल पहले बिहटा में एयरपोर्ट की घोषणा की गई थी। 2022 तक काम पूरा हो जाना था। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनाने में जमीन बाधक बना है। प्रशासन द्वारा अब तक अल्पसंख्यक बहुल सर्फुद्दीनपुर गांव की जमीन अधिग्रहण नहीं किये जाने से बिहटा एयरपोर्ट को 191 एकड़ जमीन नहीं दिया जा सका है। पटना वरीय सामाजिक कार्यकर्ता और डॉ. अशोक सिन्हा लगातार प्रयास कर रहे हैं कि बिहटा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार किया जाए। इसको लेकर वे लगातार काम कर रहे हैं। वे कहते हैं कि प्रशासन किस डर से  सर्फुद्दीनपुर गांव की जमीन का अधिग्रहण नहीं कर रहा। अगल-बगल का जमीन तो प्रशासन ने अधिग्रहण कर लिया फिर इस गांव की जमीन अधिग्रहण करने में पसीना क्यों छूट रहा है। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं सरकार की मंशा ठीक नहीं है। इसी वजह से बिहटा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने में बाधा उत्पन्न हो रही है। डॉ. अशोक सिन्हा ने कहा कि अगर सरकार 191 एकड़ जमीन जो सर्फुद्दीनपुर गांव में पड़ता है उसका अधिग्रहण नहीं करती है तो वे न्यायालय का रास्ता अख्तियार करेंगे। क्यों कि अगर सरकार नहीं सुनेगी तो फिर कोर्ट में पीआईएल दायर करने का ही विकल्प बचता है। इस संबंध में वे वकीलों से राय-मशविरा कर रहे हैं। 


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