BJP ने 'कुशवाहा' से पूछा- नीतीश जी को 'शिखंडी' कहे जाने पर इतने भड़क गए ? नीतीश कुमारी भी कहा गया था और राबड़ी जी क्या कहकर अपमानित की थीं, याद ही होगा...

BJP ने 'कुशवाहा' से पूछा- नीतीश जी को 'शिखंडी' कहे जाने पर इतने भड़क गए ? नीतीश कुमारी भी कहा गया था और राबड़ी जी क्या कहकर अपमानित की थीं, याद ही होगा...

PATNA: सत्ताधारी जेडीयू और राजद की दोस्ती के छह महीने के भीतर ही दोनों में तलवारें खिंच गईं हैं. दोनों दल के नेता आमने-सामने हैं. एक तरफ राजद विधायक सुधाकर सिंह हैं और दूसरी तरफ जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं. राजद विधायक ने सीएम नीतीश को शिखंडी कहा तो जेडीयू नेतृत्व भड़क गया है। उपेन्द्र कुशवाहा ने तेजस्वी यादव को चेताते हुए ऐसे विधायक पर कार्रवाई की मांग कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी कार्रवाई करने को कहा। इधर विपक्षी पार्टी बीजेपी खूब खुश है। 

भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं बिहार भाजपा प्रवक्ता डॉ० निखिल आनंद ने पूछा है कि जेडीयू में उपेंद्र कुशवाहा जी तीन में है कि तेरह में हैं या फिर जेडीयू के पेंडुलम हैं। जेडीयू जैसी पॉकेट की या जेबी पार्टी में संसदीय दल नेता का कोई मतलब है क्या? किसी भी जेडीयू के नेता से पूछिए कि उपेंद्र कुशवाहा जी की पार्टी में क्या हैसियत या वजूद है?, तो यह जवाब देने से पहले सभी हँसने लगते हैं। अब नीतीश कुमार का डूबना तय है, उपेंद्र कुशवाहा उनका पैर पकड़ कर साथ डूबें या फिर अपना वजूद बचा लें।

भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि जेडीयू में नीतीश कुमार की निजी प्रवक्ताओं की पहले से कोई कमी है क्या? एक लंबी फेहरिस्त है- ललन सिंह, विजय चौधरी, अशोक चौधरी, संजय झा, उमेश कुशवाहा आदि- आदि। अब उपेंद्र कुशवाहा जी प्रवक्ता बनके कितना भी बचाव करें तो उससे वे नीतीश कुमार की बुरी तरह से धूमिल व ध्वस्त हो गई छवि की फिर से पुनर्स्थापना नहीं कर सकते हैं। बिना पूछे प्रवक्ता बनने से ऐसा थोड़ी ही है कि नीतीश जी की अंतरात्मा जाग जाएगी और वह उपेंद्र कुशवाहा को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर देंगे। जेडीयू के सभी नेताओं को तेजस्वी यादव का पालकी ढोना और जयकारा लगाना तय हो चुका है।

निखिल आनंद ने पूछा कि अब उपेंद्र कुशवाहा जी को तकलीफ है कि नीतीश कुमार जी को 'शिखंडी' कह दिया गया तो क्या वे भूल गए कि इससे पहले तेज प्रताप यादव ने उन्हें 'नीतीश कुमारी' कहा था। मिस्टर यूटर्न, कुर्सी कुमार, पलटू राम, कुशासन कुमार जैसे सभी नाम आरजेडी ने ही नीतीश कुमार को दिए है। राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार को क्या कह कर अपमानित किया कि ललन सिंह ने मानहानि का मुकदमा किया था, फिर वापस क्यों ले लिया? निखिल आनंद ने बतौर शुभचिंतक सलाह देते हुए कहा कि उपेंद्र कुशवाहा जी को किसी व्यक्ति का निजी प्रवक्ता बनने की बजाय अपने समाजवादी मूल्य, विचारधारा, नीति, नैतिकता सिद्धांत को बचाने की राजनीति करनी चाहिए। वैसे भी एक समाजवादी नेता के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा की हैसियत जेडीयू के सबसे बड़े नेता नीतीश कुमार और ललन सिंह से भी बहुत ज्यादा है जिसका उनको एहसास होना चाहिए।

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