बिहार में जारी है भाजपा-जदयू की तकरार, आपसी नूराकुश्ती में तिनका तिनका बिखड़ रही नीतीश सरकार

बिहार में जारी है भाजपा-जदयू की तकरार, आपसी नूराकुश्ती में तिनका तिनका बिखड़ रही नीतीश सरकार

DESK : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नीत बिहार की एनडीए सरकार चाहे जितने दावे करे लेकिन बिहार में न तो बहार है और ना ही नीतीश कुमार की सरकार के बरकरार रहने की कोई निश्चित तारीख है. इसका कारण न तो विपक्षी दल हैं और ना ही सरकार के प्रति जनता का कोई आक्रोश, बल्कि इसकी वजह है पिछले कुछ दिनों से बिहार में जारी भाजपा-जदयू की तकरार. एनडीए के घटक दलों के बीच पिछले कुछ सप्ताह से नूराकुश्ती का खेल चल रहा है. इसमें भाजपा हो या जदयू या फिर हम और वीआइपी सभी दल एक दूसरे के खिलाफ लगातार कीचड़ उछालने वाली राजनीति कर रहे हैं. 

खासकर पिछले एक सप्ताह से भाजपा और जदयू नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर जिस प्रकार वाकयुद्ध चल रहा है उसने एनडीए के घटक दलों के बीच आपसी खीचतान को जगजाहिर किया है. सम्राट अशोक को क्रूर, कामुक और हत्यारा बताने के साथ ही अशोक की तुलना मुगल शासक औरंगजेब से करने वाले लेखक दया प्रकाश सिन्हा से पद्म पुरुस्कार वापस लेने की जदयू की मांग को शुरू में जिस प्रकार से भाजपा ने नजरंदाज किया उसने दोनों दलों के बीच तकरार को बढ़ाया. बाद में बिहार भाजपा अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने भले डीपी सिन्हा के खिलाफ भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का संयोजक होने का फर्जी दावा करने का आरोप लगाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया लेकिन अब तक जदयू की उस मांग पर भाजपा चुप्पी है जिसमें सिन्हा से पुरस्कार वापस लेने की मांग की गई है. 


वहीं सम्राट अशोक को लेकर बीजेपी और जेडीयू में हुई तनातनी के बाद अब सीएम नीतीश की महत्वाकांक्षी योजना शराबबंदी को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल जहां जेडीयू के प्रवक्ता अभिषेक झा के एक बयान पर 'आईना' दिखाने की कोशिश की, तो जदयू ने भी उन्हें नसीहत देने में देर नहीं की. इस बीच शनिवार को सीएम नीतीश के गृह जिले नालंदा में नौ लोगों की जहरीली शराब से हुई मौत के कथित आरोप के बाद संजय जायसवाल का वह आरोप सच साबित होता दिख रहा है जिसमें उन्होंने जेडीयू को नसीहत दी, "मीडिया की दुनिया से बाहर जाकर अपनी पंचायत के ही किसी आम व्यक्ति से संपर्क कर लीजिए. शराबबंदी और पुलिस की भूमिका समझ में आ जाएगी." 

न सिर्फ जायसवाल बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी शराबबंदी पर सवाल उठाया है. मांझी के ब्राह्मणों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर भी राजग में तकरार हो चुका है. वहीं पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी हालिया सम्राट अशोक प्रकरण पर जदयू को नसीहत दी. लेकिन सम्राट अशोक पर जिस तरीके से जदयू अध्यक्ष ललन सिंह सहित उप्रेंद्र कुशवाहा, नीरज कुमार और अभिषेक झा आदि ने बयानबाजी की है और उसकी प्रतिक्रिया में डॉ संजय जायसवाल लगातार बयानबाजी कर रहे हैं वह एनडीए की नूराकुश्ती को दर्शाता है. 

दरअसल पिछले कुछ समय के दौरान चाहे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग हो या शराबबंदी या फिर जातिगत जनगणना और सम्राट अशोक का मामला इन सभी मुद्दों पर जदयू और भाजपा के सुर अलग अलग रहे हैं. वहीं विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग और जातिगत जनगणना के मामले में जदयू के सुर में राजद ने सुर मिलाया है. इतना ही नहीं राजद ने नीतीश कुमार को खुले तौर पर एनडीए से अलग होकर राजद के साथ आने का खुला ऑफर तक दे दिया गया. 

इस बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जदयू ने भाजपा से सम्मानजनक सीटें देने की मांग की तो उस पर भी भाजपा ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली. जदयू और भाजपा के बीच चल रहा यह खींचतान यह साबित करता है कि दोनों दल भले बिहार में सत्ता के लिए साथ हों लेकिन दलों के बीच दिल मिला हो ऐसा नहीं है. ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि नीतीश कुमार कब तक भाजपा द्वारा उनकी हर मांग को दरकिनार किये जाने के बाद भी गठबंधन धर्म निभाते रहेंगे. या फिर बिहार और अपने सिद्धांतों की राजनीति के लिए वे एक बार फिर अपनी अलग राह पकड़ते हैं. 

हालाँकि भाजपा के लिए भी नीतीश कुमार का साथ छोड़कर अलग राह पकड़ना आसान नहीं होगा. नीतीश कुमार को पहले ही लालू यादव की पार्टी राजद की ओर से ऑफर आ चुका है. नीतीश अगर भाजपा से अलग होते हैं तो एक बार फिर उनके सीएम बने रहने का रास्ता साफ हो जाएगा. वहीं भाजपा अपने बलबूते कहाँ तक टिकेगी यह बड़ा सवाल है क्योंकि 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अकेले चुनाव लड़ने का नुकसान हो चुका है. वहीं नीतीश कुमार का राजद के साथ जाना उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है. तो देखना अहम होगा कि इस नूराकुश्ती का अंत कहाँ जाकर होता है. 

प्रिय दर्शन शर्मा

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