मुख्य सचिव ने जिला अधिकारियों के साथ की अल्प वर्षापात से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा, प्रतिदिन जिला कृषि टास्क फोर्स की बैठक का दिया निर्देश

मुख्य सचिव ने जिला अधिकारियों के साथ की अल्प वर्षापात से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा, प्रतिदिन जिला कृषि टास्क फोर्स की बैठक का दिया निर्देश

PATNA : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने आज राज्य के सभी जिलों के जिला पदाधिकारियों के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अल्प वर्षापात से उत्पन्न की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे। बैठक में जुलाई माह में वर्षा कम होने के कारण कई जिलों में धान की रोपनी देरी से प्रारंभ हुई। इसको देखते हुए किसानों को राहत पहुँचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा कई कदम उठाये गये हैं, जिसके संबंध में सभी जिलों के साथ समीक्षा की गई। बैठक में जिलावार वर्षापात की स्थिति की जानकारी प्राप्त की गई एवं जिलावार फसल आच्छादन की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकांश जिलों के द्वारा बताया गया कि 50 प्रतिशत से कम धान की रोपनी हुयी है। कई जिलों में 10 प्रतिशत से कम रोपनी की स्थिति प्रतिवेदित की गयी। जुलाई माह में अधिकांश जिलों में वर्षा की स्थिति औसत से काफी कम दर्ज की गयी है। लेकिन विगत 10 दिनों में वर्षापात की स्थिति में सुधार होने के कारण रोपनी एवं फसल आच्छादन में कुछ बढ़ोतरी हो रही है। 10 जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक धान रोपनी का कार्य हो चुका है लेकिन अभी भी जमुई, मुंगेर, लखीसराय, नवादा, शेखपुरा, गया, जहानाबाद एवं अरवल में धान रोपनी 25 प्रतिशत से कम दर्ज की गयी है तथा 10 जिलों में 50 प्रतिशत से कम रोपनी हुई है। दक्षिण बिहार के कुछ जिलों में धान की रोपनी का प्रतिशत काफी कम प्रतिवेदित किया गया है। इन जिलों के जिला पदाधिकारियों के द्वारा बताया गया कि वर्षापात की कमी के कारण धान आच्छादन काफी कम हुआ है। अगले सप्ताह तक रोपनी की संभावना है किंतु अब इसमें बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी होने की संभावना नहीं है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जिन इलाकों में रोपनी नहीं हो पायी है, उनका आकलन कर लिया जाय ताकि किसानों को राहत पहुंचाई जा सके।


मुख्य सचिव ने कहा कि कम वर्षा की स्थिति को देखते हुये राज्य सरकार के द्वारा सुयोग्य किसानों को डीजल अनुदान हेतु सभी जिलों में राशि उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कृषि विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि डीजल अनुदान की राशि हेतु प्राप्त आवेदनों की शीघ्र जाँचकर किसानों को डीजल अनुदान उपलब्ध कराया जाय। डीजल अनुदान की सहायता हेतु ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने सभी जिला पदाधिकारियों को इसकी मॉनिटरिंग करने का भी निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि अल्पवर्षा की स्थिति को देखते हुये किसानों को निरंतर विद्युत आपूर्ति हो। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा 20 जुलाई से कृषि फीडर के लिये 16 घंटे की विद्युत आपूर्ति का निदेश दिया गया है। प्रधान सचिव ऊर्जा को कृषि फीडर को कम से कम 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

मुख्य सचिव ने कहा कि जहाँ-जहाँ विद्युत अथवा यांत्रिक दोष के कारण राजकीय नलकूप बंद है, वहाँ मरम्मति करवाकर उन्हें चालू करने की कार्रवाई की जाय। राजकीय नलकूपों हेतु विद्युत की 16 घंटे प्रतिदिन आपूर्ति करवाने का निदेश दिया गया। मुख्य सचिव ने लघु जल संसाधन विभाग के नलकूपों के रखरखाव हेतु दिये गये राशि के विरूद्ध उपयोगिता प्रमाण-पत्र समर्पित करने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने सचिव कृषि विभाग को निर्देश दिया कि वे आकस्मिक फसल योजना पर तेजी से कार्य करें। कृषि विभाग पर्याप्त बीज का भंडारण कर लें ताकि यदि अगस्त में भी पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो किसानों को वैकल्पिक फसल के लिए बीज उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने सभी जिला पदाधिकारियों को नहरों, कृषि फीडर तथा डीजल अनुदान के माध्यम से सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध करवाने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मुख्य सचिव ने सभी जिला पदाधिकारियों को प्रतिदिन जिला कृषि टास्क फोर्स की बैठक आहूत करने का निर्देश दिया। राज्य स्तर पर प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे आपातकालीन प्रबंधन समूह की बैठक आहूत करने का निर्देश आपदा प्रबंधन विभाग को दिया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। सभी जिला पदाधिकारी कृषि समन्वयक के साथ जिला स्तर पर 2 अगस्त को बैठक करेंगे तथा उन्हें सभी पंचायतों  में भेजकर वहाँ की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे तथा किसानों को हरसंभव मदद पहुंचायेंगे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ, प्रधान सचिव ऊर्जा संजीव हंस, सचिव कृषि एन० सरवन कुमार, सचिव, जल संसाधन -सह- आपदा प्रबंधन संजय कुमार अग्रवाल उपस्थित थे।

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