लाखों लोगों को मौत की नींद सुलानेवाला कोरोना बन गया युवक की जान बचने का कारण, यकीन न हो तो पढ़ें यह खबर

लाखों लोगों को मौत की नींद सुलानेवाला कोरोना बन गया युवक की जान बचने का कारण, यकीन न हो तो पढ़ें यह खबर

DESK : कोरोना, यह नाम ही काफी है, दुनिया में लोगों को सिहराने के लिए। क्योंकि पिछले दो साल में कोरोना ने दुनिया में करोड़ों की जान ली है। लेकिन क्या इस बात पर यकीन करेंगे कि इस महामारी के कारण किसी युवक की निश्चित कुछ दिनों के टल गई।

आश्चर्यचकित करनेवाला यह मामला सिंगापुर से जुड़ा है। जहां भारतीय मूल के एक युवक धर्मलिंगम को 12 साल पहले हेरोइन तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। लगभग एक दशक से ज्यादा समय तक चले अलग अलग अदालतों में चले मुकदमे के बाद उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। आज इस 33 वर्षीय युवक को फांसी चढ़ाया जाना था। जेल में फांसी की सारी तैयारी पूरी हो चूकी थी। लेकिन धर्मलिंगम की किस्मत यहां साथ दे गई और उसकी फांसी को कुछ समय के लिए टाल दिया गया।

कोरोना बना कारण

भारतीय मूल के धर्मलिंगम को मादक पदार्थ की तस्करी के अपराध में बुधवार को फांसी पर चढ़ाया जाना था। लेकिन, सजा से पहले धर्मलिंगम को उसके मृत्युदंड के विरूद्ध आखिरी अपील पर सुनवाई के लिए अपीलीय न्यायालय में लाया गया, न्यायाधीश ने अदालत में कहा कि धर्मलिंगम कोरोना संक्रमित पाया गया है। न्यायमर्ति एंड्रू फांग, न्यायमूर्ति जूदिथ प्रकाश और न्यायमूर्ति कन्नन रमेश की एक पीठ ने कहा कि यह तो काफी अप्रत्याशित है। फांसी के ऐन मौके पर धर्मलिंगम के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अधिकारी भी सोच में पड़ गए कि अब आगे क्या किया जाए। 

टल गई फांसी

जज ने कहा कि अदालत का मानना है कि 'वर्तमान परिस्थितियों' में मृत्युदंड पर अमल करने की दिशा में बढ़ना उपयुक्त नहीं है। जज फांग ने कहा कि यदि यह शख्स कोरोना संक्रमित हो गया है तो उसे फांसी पर नहीं चढ़ाया जा सकता है। इसी के साथ ही उन्होंने मामले की सुनवाई टाल दी लेकिन अगली तारीख अभी तय नहीं की गई। 

सिंगापुर के चर्चित केसों में है शामिल

सिंगापुर में फांसी का एक बेहद चर्चित मामला है क्योंकि उसे 11 साल पहले यह सजा सुनाई गई थी। धर्मलिंगम को 2009 में हेरोइन सिंगापुर लाने के अपराध में 2010 में मौत की सजा सुनाई गई थी। वह 2011 में उच्च न्यायालय में, 2019 में शीर्ष अदालत में तथा 2019 में राष्ट्रपति से राहत पाने में नाकाम रहा। धर्मलिंगम को फांसी पर चढ़ाने के दिन समय नजदीक आने पर यह मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया था। मलेशिया के प्रधानमंत्री इस्माइल सबरी याकोब ने उसे राहत देने के लिए पत्र लिखा था। वहीं नहीं धर्मलिंगम को माफी देने की मांग संबंधी ऑनलाइन याचिका पर 70000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर भी किए हैं। 

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