बिहार के कितने अफसरों-कर्मियों पर भ्रष्टाचार के दाग ? निगरानी ने 2021 तक की जारी की सूची, प्रोन्नति के लिए अलग से 'स्वच्छता प्रमाण' की जरूरत नहीं

बिहार के कितने अफसरों-कर्मियों पर भ्रष्टाचार के दाग ? निगरानी ने 2021 तक की जारी की सूची, प्रोन्नति के लिए अलग से 'स्वच्छता प्रमाण' की जरूरत नहीं

PATNA:  बिहार में लंबे समय से सरकारी अधिकारियों-कर्मियों की प्रोन्नति बाधित है। प्रोन्नति के लिए निगरानी स्वच्छता की जरूरत होती है। सूबे में 2006 से लेकर दिसंबर 2021 तक चार हजार से अधिक सरकारी सेवक ऐसे हैं जिन पर निगरानी ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामलों में केस दर्ज किया है। निगरानी विभाग ने वैसे तमाम अधिकारियों-कर्मियों की सूची जारी की है। सभी विभागों से कहा गया है कि सूची के आधार पर प्रोन्नति पर निर्णय लें। अब अलग से निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र मांगने की जरूरत नहीं। 

निगरानी ब्यूरो में 2021 तक 4517 केस दर्ज 

निगरानी विभाग की तरफ से बताया गया है कि 2006 से लेकर 31 दिसंबर 2021 तक 4517 लोकसेवकों के खिलाफ निगरानी में केस दर्ज है। निगरानी ब्यूरो द्वारा दर्ज केस और केस की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई है। निगरानी विभाग ने सूबे के सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव के अलावे सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखा है. वहीं विशेष निगरानी इकाई की तरफ से 27 लोकसेवक व एक अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।केस अपडेट की पूरी जानकारी साझा की गई है। 


प्रोन्नति के लिए अलग से स्वच्छता प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं

निगरानी विभाग के ओएसडी अरुण कुमार ठाकुर ने अपने पत्र में सरकारी अफसरों-कर्मियों के विरुद्ध दर्ज केस के संबंध में विस्तृत जानकारी दी है. पत्र में कहा गया है कि संबंधित पदाधिकारियों-कर्मियों के विरुद्ध दर्ज केस,आरोप पत्र की सूची 16 सितंबर 2021 को भेजी गई थी. अब वर्ष 2006 से लेकर दिसंबर 2021 तक दर्ज केस, समर्पित आरोप पत्रों की सूची आप सभी को भेजी जा रही हैं. पदोन्नति के लिए 30 जून 2022 तक विचार किए जाने वाले मामलों में अब अलग से निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र भेजने की जरूरत नहीं है. ऐसे में इस सूची में शामिल पदाधिकारियों एवं कर्मियों के संबंध में निगरानी स्वच्छता का संधारण विभाग के स्तर से की जाये। प्रोन्नति के मामलों के अतिरिक्त अन्य मामलों में अगर निगरानी स्वच्छता की आवश्यकता हो तभी निगरानी विभाग से अनुरोध करें.

आईएएस अफसर दीपक आनंद का केस अनुसंधान में 

विशेष निगरानी इकाई ने 28 मामले दर्ज किये। विभाग की तरफ से जो जानकारी दी गई है उसमें गया विश्वविद्यालय के कुलपति राजेंद्र प्रसाद के खिलाफ कांड संख्या 2-2021दर्ज है। यह केस अभी अनुसंधान के अंतर्गत है. वही समाज कल्याण विभाग में सीडीपीओ ज्योति के खिलाफ 3-2021 केस दर्ज है। यह भी अनुसंधान में है. खनन विभाग के अधिकारी मृत्युंजय कुमार का केस भी अनुसंधान के तहत है. उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक संजय कुमार सिंह,कृषि विभाग के तत्कालीन संयुक्त निदेशक वैद्यनाथ रजक, वन प्रमंडल पदाधिकारी अवधेश कुमार ओझा, शहरी विकास विभाग के अनुभूति श्रीवास्तव और कामेश्वर प्रसाद सिंह, सामान्य प्रशासन विभाग के तत्कालीन डीडीसी रविकांत तिवारी, आईएएस अफसर दीपक आनंद का केस अनुसंधान में है. निबंधन उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के सहायक महानिरीक्षक अजय कुमार मिश्र पर भी केस दर्ज है। मोतिहारी के उत्पाद अधीक्षक रहे अविनाश प्रकाश, उपनिबंधक मणि रंजन राकेश का केस अनुसंधान में है। इसके अलावे एसवीयू की लिस्ट में अन्य सरकारी सेवकों के नाम हैं जिन पर केस दर्ज है। वहीं, निगरानी ब्यूरो की विभागवार पूरी लिस्ट है। उस लिस्ट में 4517 लोगों के नाम दर्ज हैं. इनमें अधिकांश सरकारी सेवक हैं.


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